वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत ने विदेशी निवेश (FDI) में जबरदस्त उछाल दर्ज किया है। सकल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (Gross FDI) **17.3%** बढ़कर **$94.5 अरब** (लगभग ₹7.8 लाख करोड़) तक पहुंच गया। यह वृद्धि वैश्विक औसत से काफी बेहतर है और भारत की आंतरिक औद्योगिक क्षमता निर्माण पर बढ़ते फोकस को दर्शाती है।
क्यों बढ़ रहा है भारत में FDI?
इस बंपर निवेश की मुख्य वजह सरकार की वो नीतियां हैं जिन्होंने विदेशी कंपनियों के लिए भारत में कारोबार करना आसान बना दिया है। प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) जैसी योजनाओं ने खास सेक्टर्स में निवेश को बढ़ावा दिया है। इसके अलावा, नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम और प्रोजेक्ट डेवलपमेंट सेल्स (Project Development Cells) जैसी पहलों ने विदेशी कंपनियों के लिए संचालन स्थापित करने की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित किया है।
सिर्फ चीन का विकल्प नहीं, बन रहा अपना इकोसिस्टम!
भारतीय बाजार के जानकारों का मानना है कि भारत अब सिर्फ चीन जैसे मैन्युफैक्चरिंग हब के विकल्प से आगे बढ़कर, वैश्विक पूंजी के लिए अपना एक मजबूत आंतरिक इकोसिस्टम बना रहा है। यह 17.3% की वृद्धि दर, 2025 के वैश्विक औसत 6% की वृद्धि से कहीं ज्यादा है।
टेक और AI पर फोकस
निवेश का चरित्र भी बदल रहा है। नया पैसा टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में लग रहा है। केर्नी (Kearney) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 40% ग्लोबल एग्जीक्यूटिव्स भारत के स्किल्ड टैलेंट पूल को निवेश का एक बड़ा कारण मानते हैं। यह हाई-टेक और सर्विस-ओरिएंटेड सेक्टर्स की ओर बदलाव का संकेत है।
रोजगार पर बहस
हालांकि, इस पूंजी प्रवाह पर एक बहस भी छिड़ गई है। कुछ जानकारों का कहना है कि टेक्नोलॉजी और AI-केंद्रित निवेश पारंपरिक, लेबर-इंटेंसिव मैन्युफैक्चरिंग की तुलना में कम नौकरियां पैदा करते हैं। यानी, टेक्नोलॉजी से ग्रोथ तो बढ़ रही है, लेकिन व्यापक आर्थिक फायदे इस बात पर निर्भर करेंगे कि यह पैसा उन सेक्टर्स में भी जाता है या नहीं जहां ज्यादा लोगों को रोजगार मिले।
ग्रीनफील्ड मैन्युफैक्चरिंग में नरमी
एक और अहम बात यह है कि कुल FDI बढ़ने के बावजूद, 2025 में ग्रीनफील्ड मैन्युफैक्चरिंग निवेश में थोड़ी नरमी देखी गई। यह घरेलू समस्याओं के कारण कम, बल्कि वैश्विक आर्थिक अस्थिरता और बदलती टैरिफ नीतियों के कारण हुआ। यह वैश्विक अस्थिरता उन कंपनियों के लिए एक जोखिम बनी हुई है जो इंटरनेशनल सप्लाई चेन पर निर्भर हैं।
आगे क्या है निवेशकों के लिए?
आगे चलकर, ग्लोबल कॉर्पोरेशन्स भारत में अपनी मौजूदगी बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध दिख रही हैं। 88% से अधिक सर्वे किए गए एग्जीक्यूटिव्स अगले तीन सालों में अपना निवेश बढ़ाने की योजना बना रहे हैं। भारत के लिए इस ट्रेंड की निरंतरता नीतिगत स्थिरता और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट की गति पर निर्भर करेगी। सरकार की क्लीयरेंस प्रक्रिया को सुचारू बनाने और रेगुलेटरी बाधाओं को कम करने की कोशिशें निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण होंगी।
