India-China Trade: चीन के साथ व्यापारिक रिश्तों को सामान्य करने की तैयारी, $112 बिलियन का ट्रेड डेफिसिट है बड़ी चुनौती

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AuthorNeha Patil|Published at:
India-China Trade: चीन के साथ व्यापारिक रिश्तों को सामान्य करने की तैयारी, $112 बिलियन का ट्रेड डेफिसिट है बड़ी चुनौती

कॉमर्स मिनिस्टर Piyush Goyal ने चीन के साथ आर्थिक संबंधों को फिर से पटरी पर लाने के संकेत दिए हैं। हालांकि, यह पूरी तरह से बेहतर और संतुलित ट्रेड शर्तों पर निर्भर करेगा। वित्त वर्ष 2026 में चीन के साथ भारत का ट्रेड डेफिसिट **$112 बिलियन** के पार पहुंच गया है, जो घरेलू मैन्युफैक्चरिंग के लिए एक बड़ी चुनौती है।

कॉमर्स मिनिस्टर Piyush Goyal ने संकेत दिए हैं कि सरकार अब चीन के साथ आर्थिक संबंधों को सामान्य करने की दिशा में काम कर रही है। यह बदलाव सितंबर 2026 में BRICS समिट के दौरान प्रधानमंत्री Narendra Modi और राष्ट्रपति Xi Jinping के बीच हुई बातचीत के बाद आया है, जिसका मुख्य एजेंडा व्यापारिक असंतुलन को दूर करना था।

क्यों बढ़ रही है चिंता?

भारत के लिए यह फैसला लेना काफी जरूरी हो गया है क्योंकि व्यापार का अंतर लगातार बढ़ता जा रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का चीन के साथ ट्रेड डेफिसिट $112.16 बिलियन पर पहुंच गया था। मौजूदा साल की बात करें तो, केवल शुरुआती तीन तिमाहियों में ही यह आंकड़ा $105.93 बिलियन को छू चुका है। भारत का कुल द्विपक्षीय व्यापार $151.10 बिलियन है, जिसमें चीनी इंपोर्ट्स की भारी हिस्सेदारी घरेलू अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय है।

सरकार की शर्तें क्या हैं?

मिनिस्टर Goyal ने साफ किया है कि संबंधों में सुधार 'बिना किसी शर्त' के नहीं होगा। सरकार फेयर ट्रेड, लॉन्ग-टर्म कंटिन्यूटी और स्थिर जियोपॉलिटिकल माहौल चाहती है। सरकार का रुख स्पष्ट है कि व्यापार तभी आगे बढ़ेगा जब भारतीय कंपनियों को मार्केट में बराबरी का मौका मिले और किसी भी तरह का स्ट्रक्चरल इंबैलेंस न हो।

निवेशकों के लिए क्या है मतलब?

जो सेक्टर चीन से इंपोर्ट पर ज्यादा निर्भर हैं, जैसे कि कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा और क्रिटिकल मशीनरी, वे इन कूटनीतिक बदलावों के प्रति काफी सेंसिटिव हैं। तनाव बढ़ने पर सप्लाई चेन में बाधा या अचानक रेगुलेटरी बदलावों का रिस्क बना रहता है। हालांकि, 'Atmanirbhar Bharat' के तहत सरकार का जोर सप्लाई चेन को डायवर्सिफाई करने पर बना रहेगा। निवेशकों को अब आने वाले समय में फॉरेन इन्वेस्टमेंट रेगुलेशंस और नई ट्रेड पॉलिसी पर नजर रखनी होगी, क्योंकि इनका सीधा असर कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर पड़ सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.