US Trade Deal: क्या भारत को मिलेगा बड़ा फायदा? पीयूष गोयल की US यात्रा पर निवेशकों की नज़र

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AuthorMehul Desai|Published at:
US Trade Deal: क्या भारत को मिलेगा बड़ा फायदा? पीयूष गोयल की US यात्रा पर निवेशकों की नज़र

कॉमर्स मिनिस्टर Piyush Goyal इस वक्त अमेरिका के दौरे पर हैं, जहाँ वे एक बड़े बाइलेटरल ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर बातचीत कर रहे हैं। इसका मुख्य मकसद भारतीय एक्सपोर्टर्स के लिए टैरिफ को कम करना है ताकि वियतनाम और बांग्लादेश जैसे देशों से मिल रही कड़ी टक्कर का मुकाबला किया जा सके।

ट्रेड एग्रीमेंट की अहमियत

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल 29 सितंबर से 5 अक्टूबर तक अमेरिका में हैं, जहाँ उनकी कोशिश एक लॉन्ग-टर्म ट्रेड फ्रेमवर्क तैयार करने की है। भारत का लक्ष्य अपने टेक्सटाइल, केमिकल और ऑटो कंपोनेंट सेक्टर के लिए एक ऐसा टैरिफ स्ट्रक्चर हासिल करना है, जो वियतनाम, थाईलैंड और बांग्लादेश जैसे प्रतिद्वंद्वी देशों के मुकाबले भारतीय सामान को सस्ता और प्रतिस्पर्धी बना सके।

रेगुलेटरी चुनौतियां और रूस-ईरान का कनेक्शन

मौजूदा माहौल काफी चुनौतीपूर्ण है। Section 301 ड्यूटीज और 'Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026' जैसे कानूनों के कारण एक्सपोर्ट का गणित बिगड़ गया है। हालांकि भारत पर अभी अधिकतम ड्यूटी रेट्स नहीं हैं, लेकिन रूस से कच्चे तेल (Crude Oil) की लगातार खरीद के चलते डिप्लोमेसी बहुत ही बारीकी से करनी पड़ रही है ताकि एक्सपोर्ट ड्यूटी पर कोई नकारात्मक असर न पड़े।

ट्रेड सरप्लस में आई कमी

निवेशकों को इस बात पर गौर करना चाहिए कि अमेरिका के साथ भारत का मर्चेंडाइज ट्रेड सरप्लस घटकर $12.4 बिलियन रह गया है, जो पिछले फाइनेंशियल ईयर की इसी अवधि में $15.4 बिलियन था। इसकी मुख्य वजह भारत द्वारा अमेरिकी एनर्जी और टेक प्रोडक्ट्स का बड़ा आयात है। अब US ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव Jamieson Greer के साथ होने वाली बातचीत यह तय करेगी कि क्या मौजूदा ट्रेड फ्रेमवर्क में सुधार होगा या इसे नए सिरे से तैयार किया जाएगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.