भारतीय निर्यातकों के लिए राहत की खबर है। सरकार ने RELIEF पहल को 6 महीने बढ़ाकर 31 मार्च 2027 तक कर दिया है। इसके तहत ECGC के जरिए एक्सपोर्टर्स को **95%** तक रिस्क कवर मिलेगा, जिससे वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव के बीच बढ़ती शिपिंग लागत और बीमा खर्चों को संभालने में मदद मिलेगी।
भारत सरकार ने समुद्र मार्ग पर बढ़ते तनाव के बीच निर्यातकों को बड़ी राहत देते हुए Resilience & Logistics Intervention for Export Facilitation (RELIEF) पहल को छह महीने का विस्तार दिया है। अब यह सपोर्ट फ्रेमवर्क 31 मार्च 2027 तक प्रभावी रहेगा। इस फैसले का मुख्य मकसद वेस्ट एशिया में चल रहे तनाव के कारण बढ़े हुए माल ढुलाई (Freight) और बीमा प्रीमियम (Insurance Premiums) के आर्थिक बोझ को कम करना है।\n\n### प्रॉफिट मार्जिन को बचाने की कवायद\n\nइस योजना का मुख्य आधार Export Credit Guarantee Corporation of India (ECGC) द्वारा दिया जाने वाला कवर है। इसके तहत, पात्र निर्यातक अपने शिपमेंट पर 95% तक रिस्क कवर का लाभ उठा सकते हैं। टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग गुड्स और ऑटो कंपोनेंट्स जैसे सेक्टरों में मुनाफा बहुत कम होता है, और लॉजिस्टिक्स खर्च बढ़ने से सीधे इनके मार्जिन पर असर पड़ता है। यह कवर कंपनियों को अनपेक्षित शिपिंग खर्चों से सुरक्षा देकर विदेशी ऑर्डर्स को पूरा करने में मदद करेगा।\n\nयह राहत 16 मार्च 2026 या उसके बाद ली गई पॉलिसीज पर लागू होगी। हालांकि, ध्यान रहे कि सरकार ने एनर्जी से जुड़े शिपमेंट जैसे तेल और गैस को इस प्रोग्राम से बाहर रखा है। एक्सपोर्टर्स को अपने दावों के लिए सीधे ECGC पोर्टल का उपयोग करना होगा।\n\n### चुनौतियां और निवेशकों के लिए संकेत\n\nयह राहत एक अस्थायी समाधान है। वेस्ट एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के चलते शिपिंग में देरी और लंबे रास्तों के कारण फ्यूल की खपत बढ़ रही है। निवेशकों को इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि यह स्थिति भारतीय निर्यात की प्रतिस्पर्धात्मकता (Competitiveness) को कैसे प्रभावित करती है। अगली तिमाही के नतीजों में देखना होगा कि यह लागत बढ़ना कंपनियों के प्रॉफिट पर कितना दबाव डालता है और क्या मार्च 2027 के बाद भी सरकार इसे और आगे बढ़ाती है।
