इस साल अप्रैल से जून तिमाही में भारत का सिंगापुर और श्रीलंका को एक्सपोर्ट (Export) **100%** से ज्यादा बढ़ गया है। फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के बढ़ते इस्तेमाल से यह ग्रोथ तो दिखी है, लेकिन बढ़ते ट्रेड डेफिसिट (Trade Deficit) से इकॉनमी पर दबाव बना हुआ है।
एक्सपोर्ट में बंपर उछाल, FTAs का असर
फाइनेंशियल ईयर 2026-27 की पहली तिमाही में भारत के इंटरनेशनल ट्रेड (International Trade) ने अच्छी शुरुआत की है। फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) वाले देशों को एक्सपोर्ट में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। अप्रैल-जून 2026 के आंकड़े बताते हैं कि सिंगापुर और श्रीलंका को भेजी गई खेप पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले दोगुनी से ज्यादा हो गई है। यह दिखाता है कि ट्रेड पैक्ट्स (Trade Pacts) का भारत के एक्सपोर्ट पर असर बढ़ रहा है।
किन देशों को हुआ सबसे ज्यादा फायदा?
सिंगापुर को होने वाला एक्सपोर्ट 101.2% बढ़कर $6.52 बिलियन तक पहुंच गया। वहीं, श्रीलंका को भेजा गया माल 123.8% की भारी उछाल के साथ $2.35 बिलियन रहा। इस बढ़ोतरी में ASEAN और SAFTA रीजन में ट्रेड (Trade) का बढ़ना भी शामिल है। उदाहरण के लिए, ASEAN रीजन को एक्सपोर्ट 61.6% बढ़कर $14.61 बिलियन हुआ, जबकि SAFTA को भेजा गया माल 36.6% बढ़कर $8.40 बिलियन दर्ज किया गया।
एक्सपोर्टर्स ने कैसे उठाया फायदा?
ट्रेड वॉल्यूम (Trade Volume) में यह बढ़ोतरी इसलिए भी हुई क्योंकि ज्यादा से ज्यादा कंपनियां अब ट्रेड पैक्ट्स का इस्तेमाल कर रही हैं। इन एग्रीमेंट्स के तहत कम टैरिफ (Tariff) का फायदा उठाने के लिए सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन (Certificate of Origin) जारी करने का आंकड़ा इस तिमाही में 7.8 लाख तक पहुंच गया। इससे साफ है कि भारतीय एक्सपोर्टर्स अब इंटरनेशनल मार्केट में अपने प्रोडक्ट्स को सस्ता और कॉम्पिटिटिव (Competitive) बनाने के लिए कम ड्यूटीज (Duties) का फायदा उठा रहे हैं।
ट्रेड डेफिसिट पर नज़र
एक्सपोर्ट में इस तेजी के बावजूद, इकॉनमी एक्सपर्ट्स और पॉलिसी मेकर्स (Policy Makers) देश के ट्रेड बैलेंस (Trade Balance) पर कड़ी नजर रख रहे हैं। पहली तिमाही में कुल मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट (Merchandise Export) 16% बढ़कर $129.32 बिलियन हुआ, लेकिन जुलाई 2026 में मर्चेंडाइज ट्रेड डेफिसिट (Merchandise Trade Deficit) पिछले छह महीनों के मुकाबले सबसे ज्यादा यानी $31.98 बिलियन पर पहुंच गया। यह बढ़त इंपोर्ट (Import) की तेज ग्रोथ की वजह से है, खासकर इलेक्ट्रॉनिक्स, क्रूड ऑयल (Crude Oil) और गोल्ड (Gold) जैसी जरूरी चीजों में। लगातार बड़ा ट्रेड डेफिसिट भारतीय रुपये (Indian Rupee) पर दबाव डाल सकता है और देश के करंट अकाउंट बैलेंस (Current Account Balance) को प्रभावित कर सकता है।
आगे क्या?
मार्केट अब इन ट्रेड डायनामिक्स (Trade Dynamics) को देखेगा, खासकर 15 जुलाई 2026 को भारत-यूके ट्रेड एग्रीमेंट (India-UK Trade Agreement) के लागू होने के बाद। यह देखना अहम होगा कि ये पार्टनरशिप्स सिर्फ एक्सपोर्ट वॉल्यूम बढ़ाने के बजाय ट्रेड को कैसे बैलेंस करती हैं। इसके अलावा, ग्लोबल सप्लाई चेन (Global Supply Chain) में बदलाव और बड़े देशों द्वारा संभावित टैरिफ (Tariff) में बदलाव आने वाले तिमाहियों में एक्सपोर्ट ग्रोथ की सस्टेनेबिलिटी (Sustainability) को कैसे प्रभावित करेंगे, इस पर भी निवेशकों की नजर रहेगी।
