भारत के मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट में **21 सितंबर** तक **15%** से ज्यादा की ग्रोथ दर्ज की गई है। इसी के साथ UAE ने भारत में **$25 अरब** के अतिरिक्त निवेश का ऐलान किया है, जिससे कुल निवेश **$100 अरब** तक पहुँचने का लक्ष्य है।
एक्सपोर्ट में मजबूती
ग्लोबल सप्लाई चेन और 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) जैसे रूट पर जारी तनाव के बावजूद भारतीय एक्सपोर्ट ने शानदार प्रदर्शन किया है। कॉमर्स एंड इंडस्ट्री मिनिस्टर पीयूष गोयल ने बताया कि फाइनेंशियल ईयर की पहली छमाही में देश की मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन की नीतियां सफल रही हैं।
UAE का बड़ा दांव
14वीं इंडिया-UAE हाई-लेवल टास्क फोर्स की बैठक के बाद भारत-UAE आर्थिक साझेदारी एक नए पड़ाव पर पहुँच गई है। UAE अब भारत में $25 अरब का और निवेश करेगा। यह फंड मुख्य रूप से इन्फ्रास्ट्रक्चर, एनर्जी और लॉजिस्टिक्स जैसे कैपिटल-इंटेंसिव सेक्टर में जाएगा, जो आने वाले समय में देश की इकोनॉमी को बड़ा बूस्ट दे सकते हैं।
ट्रेड बैलेंस का गणित
हालांकि एक्सपोर्ट बढ़ा है, लेकिन अप्रैल से अगस्त के बीच का डेटा एक पेचीदा तस्वीर पेश करता है। इस अवधि में मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट 17.85% बढ़कर $215.91 अरब रहा, लेकिन इम्पोर्ट (आयात) की रफ्तार 18.21% रही, जो कुल $363 अरब तक पहुँच गया है। बढ़ता हुआ ट्रेड डेफिसिट (व्यापार घाटा) अभी भी निवेशकों के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि यह सीधे तौर पर करेंसी स्टेबिलिटी को प्रभावित करता है।
आगे की राह
बाजार अब अप्रैल-सितंबर 2026-27 के पूरे डेटा का इंतजार कर रहा है, जो अगले महीने के मध्य में आएगा। निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि क्या एक्सपोर्ट और इम्पोर्ट के बीच का अंतर कम हो रहा है या यह और बढ़ेगा।
