Sovereign Equity Model: क्या Cash UBI की जगह लेंगे सरकारी शेयर? सरकार की नई योजना

ECONOMY
Whalesbook Logo
AuthorAditi Chauhan|Published at:
Sovereign Equity Model: क्या Cash UBI की जगह लेंगे सरकारी शेयर? सरकार की नई योजना

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से पैदा हो रहे जॉब संकट को देखते हुए सरकार वेलफेयर मॉडल बदलने की तैयारी कर रही है। अब कैश ट्रांसफर के बजाय नागरिकों को सरकारी कंपनियों (PSUs) में हिस्सेदारी देने पर विचार किया जा रहा है।

भारत सरकार अपनी वेलफेयर नीतियों में एक बड़ा बदलाव लाने पर मंथन कर रही है। पारंपरिक 'यूनिवर्सल बेसिक इनकम' (UBI) के तहत नकद बांटने के लिए हर साल ₹11 लाख करोड़ से ज्यादा के फंड की जरूरत होगी, जो फिस्कल डेफिसिट के लक्ष्यों को देखते हुए काफी चुनौतीपूर्ण है। इस विकल्प के तौर पर सरकार अब नागरिकों को सरकारी कंपनियों (PSUs) में इक्विटी देने की योजना बना रही है।

कैसे काम करेगा यह नया मॉडल?

इस योजना का आधार भारत का मजबूत डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर है। डिजिटल पहचान और बैंक खातों के जरिए सरकार सीधे PSU के शेयर नागरिकों के डीमैट खातों में ट्रांसफर कर सकती है। इससे न केवल नागरिकों को डिविडेंड के जरिए लॉन्ग-टर्म आय का साधन मिलेगा, बल्कि वे सीधे तौर पर देश की औद्योगिक प्रगति का हिस्सा बन जाएंगे।

ग्लोबल उदाहरण और चुनौतियां

नॉर्वे जैसे देशों ने नेचुरल रिसोर्स फंड के जरिए अपने नागरिकों को वित्तीय सुरक्षा दी है। हालांकि, भारत के लिए यह मॉडल अलग होगा। PSU शेयरों में सरकार के दखल और मार्केट वोलैटिलिटी का सीधा असर लोगों की बचत पर पड़ सकता है। अगर ये कंपनियां खराब प्रदर्शन करती हैं, तो यह सोशल सिक्योरिटी के लिए जोखिम भी बन सकता है।

शेयर बाजार पर होगा बड़ा असर

अगर यह नीति लागू होती है, तो भारतीय शेयर बाजार का लैंडस्केप पूरी तरह बदल जाएगा। लाखों नए रिटेल निवेशक बाजार का हिस्सा बनेंगे, जिससे PSU शेयरों में लिक्विडिटी तो बढ़ेगी, लेकिन सरकार के लिए विनिवेश (disinvestment) की प्रक्रिया पहले से ज्यादा जटिल हो जाएगी। अब देखना यह है कि क्या यह डिजिटल फ्रेमवर्क करोड़ों छोटे पोर्टफोलियो को मैनेज करने में कामयाब हो पाएगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.