भारत सरकार ने फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के लिए तय किए गए **₹80,000 करोड़** के विनिवेश लक्ष्य को पीछे छोड़ दिया है। सरकार ने अब तक **₹88,665 करोड़** जुटा लिए हैं, जो बढ़ते सब्सिडी बिलों के बोझ को कम करने में बड़ी राहत देगा।
सरकारी खजाने के लिए बड़ी राहत
केंद्र सरकार ने फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के विनिवेश (Divestment) और एसेट मोनेटाइजेशन के लक्ष्य को बड़ी कामयाबी के साथ पूरा कर लिया है। इस सफलता से सरकार को फ्यूल और फर्टिलाइजर सब्सिडी के बढ़ते खर्चों को संभालने के लिए जरूरी फाइनेंशियल कुशन मिल गया है।
कहाँ से आया पैसा?
इस फंड का बड़ा हिस्सा प्रमुख इक्विटी ट्रांजेक्शन से आया है। इसमें IDBI Bank की हिस्सेदारी बिक्री से लगभग ₹26,500 करोड़ हासिल हुए, जबकि Life Insurance Corporation of India (LIC) के शेयरों की बिक्री ने भी इस आंकड़े तक पहुंचने में अहम भूमिका निभाई। इसके अलावा, अन्य एसेट मोनेटाइजेशन चैनलों के जरिए सरकार ने ₹6,367 करोड़ जुटाए हैं।
भविष्य की योजनाएं और चुनौतियाँ
सरकार अब इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (InvITs) के जरिए नेशनल हाईवे एसेट्स से अतिरिक्त ₹15,000 करोड़ से ₹20,000 करोड़ जुटाने की योजना बना रही है। हालांकि, कुछ प्रोजेक्ट्स अभी भी रफ्तार पकड़ने में देरी का सामना कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, Hotel Ashok की बिक्री सुरक्षा और स्ट्रक्चरल जटिलताओं के कारण रुकी हुई है, वहीं सार्वजनिक स्टेडियमों के मुद्रीकरण का प्रस्ताव भी अभी मूल्यांकन के दौर में है।
RBI का डिविडेंड बना सहारा
सरकार की वित्तीय स्थिति केवल विनिवेश पर ही नहीं, बल्कि Reserve Bank of India (RBI) से मिले ₹2.9 लाख करोड़ के रिकॉर्ड डिविडेंड पर भी टिकी है। डायरेक्ट टैक्स और GST कलेक्शन की मजबूती ने भी सरकारी खजाने को स्थिर रखा है। भले ही पेट्रोलियम उत्पादों पर एक्साइज ड्यूटी में बदलाव के चलते इनडायरेक्ट टैक्स रेवेन्यू में थोड़ी सुस्ती आई हो, लेकिन कुल मिलाकर सरकारी राजस्व आधार अभी भी मजबूत बना हुआ है।
