BRICS Summit: भारत की अध्यक्षता खत्म, पर **$226 बिलियन** का ट्रेड डेफिसिट बना चिंता

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
BRICS Summit: भारत की अध्यक्षता खत्म, पर **$226 बिलियन** का ट्रेड डेफिसिट बना चिंता

भारत ने नई दिल्ली में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के समापन के साथ ही आधिकारिक तौर पर इसकी अध्यक्षता चीन को सौंप दी है। जहां कूटनीतिक मोर्चे पर UNSC में समर्थन और GIFT सिटी में नए प्रोजेक्ट्स जैसी जीत मिली है, वहीं आर्थिक मोर्चे पर **$226.1 बिलियन** का भारी-भरकम मर्चेंडाइज ट्रेड डेफिसिट एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

भारत ने सफलतापूर्वक 2026 की BRICS अध्यक्षता का समापन कर दिया है। नई दिल्ली में संपन्न हुए 18वें शिखर सम्मेलन में 'न्यू दिल्ली डिक्लेरेशन' पर जोर दिया गया, जिसका फोकस ग्लोबल साउथ, इनोवेशन और इंडस्ट्रियल सहयोग पर रहा। निवेशकों और बाजार के जानकारों के लिए यह समिट भारत की कूटनीतिक महत्वाकांक्षाओं और घरेलू आर्थिक दबावों के बीच एक कठिन संतुलन की तरह रहा।

कूटनीतिक जीत और चुनौतियां

कूटनीतिक रूप से भारत को बड़ी सफलता मिली है। समूह ने भारत और ब्राजील के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में स्थायी सदस्यता के दावे का खुलकर समर्थन किया है। साथ ही, आतंकवाद के खिलाफ एक सामूहिक स्टैंड लेना भारत के लिए रणनीतिक बढ़त माना जा रहा है, हालांकि UNSC विस्तार के लिए किसी निश्चित समय सीमा का न होना अभी भी एक बड़ा अड़ंगा है।

आर्थिक मोर्चे पर चिंताएं

आंकड़े बताते हैं कि भारत की आर्थिक चिंताएं गहरी हैं। वित्त वर्ष 2026 में BRICS देशों के साथ भारत का मर्चेंडाइज ट्रेड डेफिसिट बढ़कर $226.1 बिलियन हो गया है, जो 2021 के $74.5 बिलियन के मुकाबले काफी अधिक है। इसमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी चीन की है, जिसके साथ अकेले भारत का डेफिसिट करीब $112.16 बिलियन रहा। यह व्यापारिक असंतुलन आने वाले समय में एक बड़ी चुनौती बना रहेगा।

GIFT सिटी की नई उम्मीदें

इस आर्थिक घर्षण को कम करने के लिए भारत ने संस्थागत ढांचे पर काम शुरू कर दिया है। गुजरात की GIFT सिटी में 'BRICS रिस्क लैब' और 'इंडिया सेंटर फॉर BRICS इंडस्ट्रियल कॉम्पिटेंसी' की स्थापना की जा रही है। इनका उद्देश्य इंश्योरेंस और री-इंश्योरेंस क्षमताओं को बढ़ाना है।

आगे की राह

हालांकि, नई दिल्ली डिक्लेरेशन में मुद्रा विनिमय (Currency Exchange) के लिए कोई ठोस फ्रेमवर्क नहीं बन पाया, जिससे स्थानीय मुद्राओं में व्यापार करने की कोशिशों पर रिस्क बना हुआ है। अब बाजार की नजर इस बात पर होगी कि चीन के पास अध्यक्षता जाने के बाद व्यापारिक दबावों को भारत कैसे मैनेज करता है और GIFT सिटी का इंफ्रास्ट्रक्चर कितनी तेजी से असर दिखाता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.