Mechanical Engineering Talent: भारत बना दुनिया का पावरहाउस, इंजीनियरिंग सेक्टर में आई बड़ी हलचल

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Mechanical Engineering Talent: भारत बना दुनिया का पावरहाउस, इंजीनियरिंग सेक्टर में आई बड़ी हलचल

भारत अब मैकेनिकल इंजीनियरिंग टैलेंट के मामले में दुनिया के टॉप **5** देशों में शामिल हो गया है। American Society of Mechanical Engineers (ASME) के अनुसार, AI-आधारित डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग में भारत की रफ्तार चीन जैसे दिग्गज देशों को टक्कर दे रही है, जो लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टर्स के लिए बड़े संकेत हैं।

ग्लोबल इंजीनियरिंग में भारत का दबदबा

American Society of Mechanical Engineers (ASME) के CEO थॉमस कोस्टाबिल ने चेन्नई में आयोजित इंटरनेशनल मैकेनिकल इंजीनियरिंग कांग्रेस में साफ किया है कि भारत अब मैन्युफैक्चरिंग के ग्लोबल लीडर्स जैसे चीन को सीधी चुनौती देने के लिए तैयार है। यह भारत की औद्योगिक परिपक्वता (maturity) को दर्शाता है, जहां एनर्जी, मोबिलिटी और मैन्युफैक्चरिंग का एक ऐसा मिश्रण तैयार हुआ है, जो देश को एक कॉम्पिटिटिव एडवांटेज दे रहा है।

टेक्नोलॉजी से बदल रही तस्वीर

भारत की इस सफलता के पीछे एडवांस डिजिटल टूल्स का बड़ा हाथ है। कंपनियां अब इंजीनियरिंग वर्कफ्लो में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), 3D प्रिंटिंग और डेटा प्रोसेसिंग का इस्तेमाल कर रही हैं। इससे प्रोडक्ट डिजाइन से लेकर कमर्शियल लॉन्च तक का समय काफी कम हो गया है। अब भारतीय फर्म्स पहले से कहीं अधिक जटिल और हाई-टेक ग्लोबल इंजीनियरिंग कॉन्ट्रैक्ट्स का हिस्सा बन पा रही हैं।

ग्रोथ सेक्टर और निवेश की संभावनाएं

खासकर न्यूक्लियर एनर्जी और एयरोस्पेस जैसे सेक्टर में भारत की प्रगति काफी तेज है। बेंगलुरू स्थित स्टार्टअप Skyroot Aerospace इस बदलाव का एक बड़ा उदाहरण है। इंजीनियरिंग रिसर्च एंड डेवलपमेंट (ER&D) सेक्टर में भारत का कद बढ़ने से विदेशी R&D निवेश भी यहां अधिक आकर्षित हो रहा है। निवेशकों के लिए यह उन कंपनियों में अवसर तलाशने का समय है जो स्पेशलाइज्ड इंडस्ट्रियल मैन्युफैक्चरिंग में काम कर रही हैं।

चुनौतियां और भविष्य की राह

हालांकि ग्रोथ की रफ्तार तेज है, लेकिन कुछ चुनौतियां भी हैं। इंडस्ट्री में वर्कफोर्स डायवर्सिटी एक बड़ा मुद्दा है। आंकड़ों के अनुसार, इंजीनियरिंग वर्कफोर्स में महिलाओं की भागीदारी करीब 15 प्रतिशत है, जो भारत में इससे भी कम है। भविष्य की विकास दर को बनाए रखने के लिए स्किल्ड टैलेंट पाइपलाइन को और अधिक समावेशी बनाना जरूरी होगा। इन्वेस्टर्स के लिए सलाह है कि वे केवल ऑर्डर बुक्स पर ही नहीं, बल्कि कंपनियों की ह्यूमन कैपिटल मैनेजमेंट और डायवर्सिटी पॉलिसीज पर भी नजर रखें।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.