सितंबर 2026 में भारत की इकोनॉमिक एक्टिविटी इंडेक्स बढ़कर **56.3** पर पहुंच गई है। इसकी मुख्य वजह फोर-व्हीलर सेल्स में **32%** की उछाल और पोर्ट ट्रैफिक में मजबूती है। हालांकि, निवेशकों को अब गिरती जॉब ग्रोथ और बढ़ती होलसेल महंगाई जैसे जोखिमों पर नजर रखनी होगी।
सितंबर 2026 में भारतीय अर्थव्यवस्था ने शानदार तेजी दिखाई है। Moneycontrol का इको पल्स इंडेक्स अगस्त के 55.7 से बढ़कर 56.3 पर पहुंच गया है, जो मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में मजबूत मोमेंटम को दर्शाता है।
ऑटो और इंफ्रा सेक्टर की चमक
इस ग्रोथ के पीछे ऑटोमोबाइल सेक्टर मुख्य इंजन बनकर उभरा है। फोर-व्हीलर रजिस्ट्रेशन में 32.4% की बड़ी बढ़ोतरी देखी गई, जो अगस्त के 19.7% के मुकाबले काफी बेहतर है। वहीं, टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर सेगमेंट में भी क्रमशः 33.5% और 63.5% का जोरदार उछाल आया है। इसके अलावा, प्रमुख बंदरगाहों पर कार्गो ट्रैफिक में 12.7% का इजाफा औद्योगिक गतिविधियों के बढ़ने का संकेत है।
लेबर मार्केट और महंगाई का दबाव
औद्योगिक आउटपुट भले ही मजबूत हो, लेकिन कुछ आंकड़े चिंता पैदा कर रहे हैं। Naukri JobSpeak इंडेक्स, जो वाइट-कॉलर हायरिंग को ट्रैक करता है, अगस्त के 13.7% के मुकाबले गिरकर महज 1.7% रह गया है, जो कंपनियों की सावधानी को दर्शाता है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भी दबाव साफ दिख रहा है, जहाँ MGNREGA के तहत काम की मांग 36% बढ़ गई है। महंगाई के मोर्चे पर होलसेल इन्फ्लेशन 11.4% और रिटेल इन्फ्लेशन 5.54% पर पहुंच गई है। RBI द्वारा पॉलिसी रेट्स को 5.5% पर स्थिर रखने से कर्ज महंगा बना हुआ है। बढ़ती इनपुट कॉस्ट और ऊंची ब्याज दरों का असर आने वाली तिमाहियों में कंपनियों के मार्जिन पर दबाव डाल सकता है।
