सरकार ने FDI नियमों में बड़ा बदलाव किया है, जिससे अब विदेशी ई-कॉमर्स कंपनियां सिर्फ एक्सपोर्ट के लिए इन्वेंट्री रख सकेंगी। हालांकि, घरेलू B2C बाजार के लिए पुराने सख्त नियम अभी भी लागू रहेंगे।
भारत सरकार ने Foreign Direct Investment (FDI) नियमों में बड़ा संशोधन करते हुए विदेशी निवेश वाली ई-कॉमर्स कंपनियों को अब इन्वेंट्री रखने की अनुमति दे दी है, लेकिन शर्त यह है कि यह सामान केवल एक्सपोर्ट (निर्यात) के लिए होना चाहिए। Department of Economic Affairs ने Foreign Exchange Management (Non-debt Instruments) Rules, 2019 में इन बदलावों को नोटिफाई कर दिया है।
बाजार के लिए क्या बदलेगा?
अब तक विदेशी ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म केवल 'मार्केटप्लेस' के तौर पर काम कर रहे थे और घरेलू ग्राहकों के लिए सामान स्टोर करने की अनुमति नहीं थी। यह रोक स्थानीय खुदरा व्यापारियों और छोटे दुकानदारों को प्रतिस्पर्धा से बचाने के लिए लगाई गई थी। अब भी घरेलू बाजार के लिए पुरानी पाबंदियां बनी रहेंगी, ताकि बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियां इनका फायदा उठाकर लोकल मार्केट में दखल न दे सकें।
ऑपरेशन्स औरCompliance का चक्रव्यूह
नई पॉलिसी के तहत, कंपनियों को कुछ कड़े नियमों का पालन करना होगा:
- मेड इन इंडिया: केवल भारत में निर्मित सामान ही एक्सपोर्ट इन्वेंट्री का हिस्सा बन सकता है।
- फॉलो करने होंगे नियम: कंपनियों को Foreign Trade Policy 2023 और FEMA के निर्यात से जुड़े नियमों का कड़ाई से पालन करना होगा।
- ऑडिट का दबाव: सरकार ने साफ किया है कि एक्सपोर्ट के लिए रखे गए सामान और घरेलू माल के बीच पूरी तरह से 'ऑडिटेड अलगाव' (Audited Separation) होना चाहिए।
जोखिम और अवसर
यह फैसला ग्लोबल ई-कॉमर्स खिलाड़ियों के लिए अपनी लॉजिस्टिक्स क्षमता का इस्तेमाल करके भारतीय निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने का एक बड़ा मौका है। लेकिन, सबसे बड़ा रिस्क 'इन्वेंट्री लीकेज' का है—यानी एक्सपोर्ट के नाम पर रखा गया माल अगर घरेलू बाजार में बिकता पाया गया, तो FEMA के तहत भारी जुर्माने लग सकते हैं। निवेशकों की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियां अपने सप्लाई चेन मॉडल को इस दोहरी व्यवस्था के हिसाब से कैसे ढालती हैं।
