India-EU Trade Pact: कानूनी अड़चनें खत्म, 2026 के अंत तक होगा बड़ा समझौता

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AuthorNeha Patil|Published at:
India-EU Trade Pact: कानूनी अड़चनें खत्म, 2026 के अंत तक होगा बड़ा समझौता

भारत और यूरोपियन यूनियन (EU) के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) की कानूनी समीक्षा (Legal Review) पूरी हो गई है। अब दोनों पक्ष **2026** के अंत तक इस समझौते पर हस्ताक्षर करने की तैयारी में हैं, जिसके बाद **2027** की शुरुआत से व्यापार नियम लागू हो सकते हैं।

भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच चल रही ट्रेड डील ने एक बड़ा पड़ाव पार कर लिया है। समझौते की जटिल कानूनी शब्दावली की जांच यानी 'लीगल स्क्रबिंग' का काम आधिकारिक तौर पर संपन्न हो गया है। यह मील का पत्थर दोनों इकोनॉमिक पावरहाउस के बीच व्यापार के नए रास्ते खोलने की दिशा में एक बड़ा कदम है।\n\nकॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल ने इस उपलब्धि की पुष्टि करते हुए बताया कि अब अगली प्रक्रिया शुरू हो गई है। आधिकारिक तौर पर इस समझौते को 2026 के अंत तक साइन किया जाएगा, जबकि इसके प्रभावी रूप से लागू होने की उम्मीद 2027 की शुरुआत में है।\n\n### डील का महत्व और व्यापार पर असर\n\nयह समझौता दुनिया की सबसे बड़ी व्यापारिक साझेदारियों में से एक है। भारतीय कंपनियों के लिए, इसका सीधा मतलब यूरोपीय बाजारों में सामानों पर लगने वाली टैरिफ (Tariff) दरों में कमी आना है, जिससे भारतीय उत्पाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ज्यादा कॉम्पिटिटिव हो जाएंगे। यह एग्रीमेंट आईटी, इंजीनियरिंग और फार्मास्यूटिकल्स जैसे सेक्टरों के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है। सरकार का लक्ष्य अपनी ग्लोबल ट्रेड पहुंच को बढ़ाकर दुनिया की बड़ी जीडीपी (GDP) वाले बाजारों के साथ जुड़ना है।\n\nइसके साथ ही सरकार चिली, पेरू, इजरायल और यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन जैसे देशों के साथ भी व्यापार समझौतों को तेजी से आगे बढ़ा रही है।\n\n### चुनौतियां और जोखिम\n\nहालांकि डील की राह आसान नहीं है। इसे अभी यूरोपियन काउंसिल और यूरोपियन पार्लियामेंट से राजनीतिक मंजूरी मिलनी बाकी है, जिसमें देरी की संभावना हमेशा बनी रहती है। साथ ही ऑटोमोबाइल, डेयरी और स्पिरिट्स जैसे संवेदनशील सेक्टरों को लेकर अभी भी बारीक बातचीत की जरूरत है।\n\nएक और बड़ा रिस्क 'CBAM' यानी कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म का है। यूरोप के नए एनवायरनमेंटल स्टैंडर्ड्स के तहत भारतीय एक्सपोर्टर्स को अपने कार्बन फुटप्रिंट पर लगाम लगानी होगी, वरना टैरिफ में छूट का फायदा बेअसर हो सकता है। अब मार्केट की नजर साल के अंत में होने वाली फॉर्मल साइनिंग और इसमें मिलने वाली खास सेक्टर-वार राहतों पर टिकी है।

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