वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने India-EU ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर बड़ा बयान दिया है। इस डील से टेक्सटाइल, फुटवियर और टॉय सेक्टर में बड़ी उछाल की उम्मीद है, लेकिन निवेशकों को अभी रैटिफिकेशन और यूरोप के कड़े मानकों (Standards) पर नजर रखनी होगी।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने म्यूनिख लीडर्स मीटिंग में भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच हुए ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर अहम जानकारी साझा की है। सरकार का मुख्य फोकस लेबर-इंटेंसिव इंडस्ट्रीज को नई गति देने पर है। इस डील का सबसे ज्यादा फायदा टेक्सटाइल, फुटवियर, खिलौने और प्रोसेस्ड गुड्स बनाने वाली कंपनियों को मिलने की उम्मीद है।\n\n### डील की मुख्य बातें:\nजनवरी 2026 में हुई इस डील के तहत दोनों ओर से बाजार खोलने पर सहमति बनी है। भारत ने अपने 92.5% टैरिफ लाइन्स को उदार बना दिया है, जबकि यूरोपीय संघ ने 99% वैल्यू-बेस्ड टैरिफ लाइन्स को खोलने का वादा किया है।\n\n### निवेशकों के लिए क्या है मौका और चुनौती?\nयह समझौता टेक्सटाइल और फुटवियर सेक्टर की कंपनियों के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है, जिससे उनकी एक्सपोर्ट वॉल्यूम में इजाफा होगा। हालांकि, राह आसान नहीं है। यूरोपीय बाजार में टिके रहने के लिए भारतीय कंपनियों को सस्टेनेबिलिटी (Sustainability), प्रोडक्ट सर्टिफिकेशन और सप्लाई-चेन ट्रांसपेरेंसी जैसे कड़े मानकों को पूरा करना होगा। जो कंपनियां पहले से ही इन स्टैंडर्ड्स का पालन कर रही हैं, उन्हें फायदा जल्दी मिलेगा, जबकि छोटी कंपनियों को ट्रांजिशन फेज में लागत बढ़ सकती है।\n\n### रैटिफिकेशन और कॉम्पिटिशन:\nफिलहाल यह एग्रीमेंट रैटिफिकेशन (मंजूरी) फेज में है। इसे लागू करने के लिए काउंसिल ऑफ द यूरोपियन यूनियन, यूरोपियन पार्लियामेंट और भारत की यूनियन काउंसिल ऑफ मिनिस्टर्स से अंतिम मुहर लगनी बाकी है। किसी भी तरह की कानूनी देरी इसे आगे बढ़ा सकती है। इसके अलावा, वियतनाम और बांग्लादेश जैसे देशों से मिल रही कड़ी टक्कर भी एक बड़ा फैक्टर है, क्योंकि उनके पास यूरोपीय बाजार में पहले से ही ट्रेड एडवांटेज मौजूद है।\n\nवित्त मंत्री ने यह भी साफ किया कि अमेरिका के साथ ट्रेड नेगोशिएशन्स फिलहाल ठंडे बस्ते में हैं, क्योंकि दोनों देशों के बीच आसान रियायतों वाला दौर खत्म हो चुका है और अब बड़े नीतिगत बदलावों की जरूरत है। फिलहाल मार्केट का पूरा फोकस यूरोप के साथ इस पार्टनरशिप पर है।
