India-EU Trade Deal: ऐतिहासिक ट्रेड डील की ओर बढ़े कदम, यूरोप के साथ व्यापार का रास्ता साफ

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AuthorMehul Desai|Published at:
India-EU Trade Deal: ऐतिहासिक ट्रेड डील की ओर बढ़े कदम, यूरोप के साथ व्यापार का रास्ता साफ

European Commission ने आधिकारिक तौर पर European Council के सामने India-EU Free Trade Agreement का प्रस्ताव रखा है। इस समझौते से **€180 बिलियन** के सालाना व्यापार का लक्ष्य रखा गया है, जिससे भारतीय एक्सपोर्टर्स को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

भारत और यूरोपीय संघ (European Union) के बीच होने वाले प्रस्तावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) ने एक अहम पड़ाव पार कर लिया है। 11 सितंबर 2026 को European Commission ने औपचारिक रूप से European Council से इस ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर करने की अनुमति मांगी है। यह कदम जनवरी 2026 में हुई सफल बातचीत के बाद उठाया गया है, जो दोनों क्षेत्रों के बीच अब तक की सबसे बड़ी आर्थिक साझेदारी साबित हो सकती है।

बाजार पहुंच और व्यापार में बढ़त

इस एग्रीमेंट का लक्ष्य भारत और यूरोपीय देशों की अर्थव्यवस्थाओं को गहराई से जोड़ना है, जिससे सालाना ट्रेड वॉल्यूम €180 बिलियन तक पहुंच सके। समझौते के तहत, यूरोपीय संघ अपने 96% सामानों पर इंपोर्ट ड्यूटी में कटौती या उसे पूरी तरह खत्म करने की योजना बना रहा है। वहीं, भारत को अपने 99% एक्सपोर्ट्स के लिए यूरोपीय बाजार में तरजीही पहुंच मिलेगी। टेक्सटाइल, लेदर, फुटवियर और इंजीनियरिंग जैसे सेक्टरों से जुड़ी भारतीय कंपनियों को अब यूरोप में अपने पैर पसारने का बड़ा मौका मिलेगा।

घरेलू उद्योगों के लिए सुरक्षा कवच

सरकार ने इस डील में घरेलू हितों का भी पूरा ख्याल रखा है। डेयरी, पोल्ट्री, अनाज और सोयाबीन जैसे संवेदनशील कृषि क्षेत्रों को इस समझौते से बाहर रखा गया है, ताकि विदेशी आयात से भारतीय किसानों को नुकसान न हो। यह कदम यह सुनिश्चित करता है कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बढ़ावा मिले, जबकि कृषि आधार सुरक्षित रहे।

आगे की राह और चुनौतियां

हालांकि यह डील अब काफी आगे बढ़ चुकी है, लेकिन अभी अंतिम मंजूरी बाकी है। European Council से हरी झंडी मिलने के बाद इसे European Parliament और भारत की घरेलू प्रक्रियाओं से गुजरना होगा। निवेशकों के लिए यहाँ कुछ जोखिम भी हैं—जैसे राजनीतिक कारणों से रटिफिकेशन में देरी या यूरोपीय सामानों के साथ बढ़ता कॉम्पिटिशन, जो कुछ घरेलू कंपनियों के मार्जिन पर दबाव डाल सकता है। साथ ही, डिजिटल कॉमर्स और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी से जुड़े नए नियमों का पालन करने में कंपनियों को शुरुआत में लागत का सामना करना पड़ सकता है। उम्मीद है कि यह समझौता 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत तक पूरी तरह लागू हो जाएगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.