India और EFTA के बीच ट्रेड डील को पूरा एक साल हो चुका है, जिसके नतीजे अब दिखने लगे हैं। नॉर्वे से भारत आने वाले एक्सपोर्ट में **34%** की जोरदार ग्रोथ दर्ज की गई है, जबकि कुल द्विपक्षीय व्यापार **9%** बढ़ गया है।
1 अक्टूबर 2025 को लॉन्च हुए भारत और यूरोपियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन (EFTA) के बीच 'ट्रेड एंड इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट' (TEPA) ने अपनी पहली सालगिरह पूरी कर ली है। यह डील अब ट्रेड के पुराने ढर्रे को बदल रही है।
सीफूड डिमांड और कोल्ड चेन लॉजिस्टिक्स
इंपोर्ट ड्यूटी हटने का फायदा सीधा दिखता है। नॉर्वेजियन सैल्मन (Norwegian salmon) जैसे उत्पादों की पहुंच भारतीय बाजार में आसान हो गई है। अक्टूबर 2025 से जून 2026 के बीच नॉर्वे से सीफूड का एक्सपोर्ट 53% उछला है। फूड रिटेल और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर के लिए यह बड़ी खबर है, लेकिन असली गेम भारत की कोल्ड-चेन इंफ्रास्ट्रक्चर की क्षमता पर टिका है। कोल्ड स्टोरेज कंपनियों के लिए यह वॉल्यूम बढ़ने से यूटिलाइजेशन बढ़ने की पूरी संभावना है।
मैरीटाइम और शिपबिल्डिंग का नया युग
भारत और नॉर्वे की पार्टनरशिप अब समुद्री कारोबार को नई ऊंचाई दे रही है। भारतीय शिपयार्ड्स में मिलने वाले कुल ऑर्डर्स में नॉर्वेजियन शिप-ओनर्स की हिस्सेदारी करीब 10% है। नॉर्वे से ऑफशोर टेक्नोलॉजी और डिजिटल पोर्ट सॉल्यूशंस भारत आने से हमारे इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करने में मदद मिल रही है। यह स्थानीय शिपबिल्डर्स के लिए काम का एक स्थिर जरिया बन सकता है।
$100 बिलियन का लंबा लक्ष्य
TEPA का विजन अगले 15 सालों में $100 बिलियन के निवेश का है। फिलहाल पहला साल व्यापारिक बाधाओं को कम करने और कमर्शियल लिंक बनाने पर केंद्रित रहा है। निवेशकों के लिए नजर रखने वाली बात यह है कि क्या यह पार्टनरशिप आगे चलकर बड़े मैन्युफैक्चरिंग या रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स में तब्दील होती है। फिलहाल, जॉइंट वेंचर्स की संख्या और औद्योगिक एकीकरण (Industrial integration) पर मार्केट की नजर बनी रहेगी।
