साल 2026 में भारत की डिजिटल फेस्टिव सेल्स में **29%** की भारी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। इस बार खरीदारी का जोश टियर-2 और टियर-3 शहरों से आ रहा है, जबकि फैशन और ई-कॉमर्स सेक्टर मजबूती दिखा रहे हैं।
भारत के ऑनलाइन फेस्टिव सीजन के लिए साल 2026 काफी अहम रहने वाला है। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस साल सेल्स में पिछले साल के मुकाबले 29% का इजाफा होगा। इस ग्रोथ का इंजन बड़े मेट्रो शहर नहीं, बल्कि टियर-2 और टियर-3 शहर बन रहे हैं।\n\n### टियर-2 शहरों में कंजम्पशन का जोर\nकंपनियां अब अपने लॉजिस्टिक्स और लास्ट-माइल डिलीवरी नेटवर्क को छोटे शहरों में तेजी से फैला रही हैं। निवेशकों के नजरिए से यह बदलाव काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे कंपनियों का ऑपरेशनल और कॉस्ट स्ट्रक्चर बदल रहा है। हालांकि इन इलाकों में पहुंच बढ़ाने से लॉजिस्टिक्स का खर्च बढ़ सकता है, लेकिन मार्केट शेयर हासिल करने के लिए यह एक अनिवार्य रणनीति है।\n\n### क्विक कॉमर्स का जलवा\nइस फेस्टिव सीजन का सबसे बड़ा ट्रेंड 'क्विक कॉमर्स' बनकर उभरा है। ये प्लेटफॉर्म्स अब सिर्फ ग्रोसरी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अन्य कैटेगरीज में भी पारंपरिक ई-कॉमर्स कंपनियों को कड़ी टक्कर दे रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, फूड डिलीवरी और पर्सनल केयर ऐप्स के लिए यह सीजन थोड़ा ठंडा रहा है, जो दिखाता है कि कंज्यूमर्स अब सुविधा के बजाय फिजिकल गुड्स की खरीदारी को प्राथमिकता दे रहे हैं।\n\n### ऑपरेशनल एफिशिएंसी पर नजर\nफिलहाल फैशन-फोकस्ड प्लेटफॉर्म्स छोटे शहरों में ट्रेंड-सेंसिटिव कंज्यूमर्स के चलते बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। हालांकि, सेक्टर के सामने सबसे बड़ी चुनौती 'ऑपरेशनल एफिशिएंसी' बनाए रखने की है। निवेशकों की नजरें इस बात पर टिकी होंगी कि कंपनियां बिना भारी-भरकम डिस्काउंट दिए और डिलीवरी कॉस्ट को कंट्रोल में रखते हुए अपनी प्रॉफिट मार्जिन को कैसे मैनेज करती हैं।
