Sugar Sector: सरकार का बड़ा फैसला, 1 नवंबर 2026 से इथेनॉल प्रोडक्शन पर लगेगी लगाम

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Sugar Sector: सरकार का बड़ा फैसला, 1 नवंबर 2026 से इथेनॉल प्रोडक्शन पर लगेगी लगाम

सरकार ने घरेलू चीनी की सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। 1 नवंबर 2026 से शुगर मिलें इथेनॉल बनाने के लिए गन्ने के रस और बी-हैवी मोलासेस का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगी, जिससे कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ सकता है।

इथेनॉल नीति में बदलाव

सरकार के इस नए निर्देश के बाद इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने इथेनॉल प्रोक्योरमेंट टेंडर से गन्ने के रस और बी-हैवी मोलासेस को बाहर कर दिया है। यह कदम महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में मानसून की अनिश्चितता के कारण उठाया गया है ताकि देश में चीनी का स्टॉक सुरक्षित रहे।

कंपनियों के मार्जिन पर क्या पड़ेगा असर?

पिछले कुछ सालों में इथेनॉल प्रोडक्शन शुगर कंपनियों के लिए कमाई का एक बड़ा जरिया रहा है, जो उन्हें चीनी मार्केट की अस्थिरता से सुरक्षा देता था। अब मिलों को वापस सफेद चीनी बनाने पर जोर देना होगा या फिर सी-हैवी मोलासेस और खराब अनाज जैसे कम वैल्यू वाले फीडस्टॉक की ओर रुख करना होगा। इससे कंपनियों के ऑपरेटिंग मार्जिन में 5% से 10% तक का दबाव देखने को मिल सकता है, क्योंकि गन्ने के रस से बने इथेनॉल पर मार्जिन काफी बेहतर होता है।

निवेशकों के लिए संकेत

हालांकि सरकार ने राहत देते हुए अक्टूबर 2026 तक के प्रोडक्शन को नवंबर में बेचने की अनुमति दी है, लेकिन लंबी अवधि में यह निवेशकों के लिए एक बड़ी चुनौती है। अब निवेशकों को कंपनियों की तिमाही नतीजों (Quarterly Financial Disclosures) पर नजर रखनी होगी, ताकि यह समझा जा सके कि वे मक्का या चावल जैसे वैकल्पिक फीडस्टॉक की तरफ कितनी तेजी से शिफ्ट हो पाती हैं। साथ ही, डोमेस्टिक शुगर प्राइसिंग में भी बदलाव की उम्मीद है, क्योंकि अब बाजार में चीनी की सप्लाई बढ़ सकती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.