सितंबर 2026 में भारत का कोर सेक्टर आउटपुट **7.9%** बढ़ गया है, जो अगस्त के संशोधित **5.9%** से बेहतर है। बुनियादी ढांचे की मांग ने कोयला और बिजली उत्पादन को मजबूती दी है, जबकि फर्टिलाइजर और नेचुरल गैस के क्षेत्र में उत्पादन की चुनौतियां बनी हुई हैं।
भारत के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों ने सितंबर 2026 में रफ्तार पकड़ ली है। मिनिस्ट्री ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के आंकड़ों के मुताबिक, आठ कोर इंडस्ट्रीज ने पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 7.9% की ग्रोथ दर्ज की है। यह अगस्त के संशोधित 5.9% के आंकड़े से काफी बेहतर है।
ये आठ उद्योग—कोयला, कच्चा तेल, नेचुरल गैस, रिफाइनरी प्रोडक्ट्स, फर्टिलाइजर, स्टील, सीमेंट और बिजली—इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन (IIP) का लगभग 40% हिस्सा हैं। इनका प्रदर्शन देश के मैन्युफैक्चरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर की सेहत का एक अहम पैमाना माना जाता है।
इंफ्रा और एनर्जी का दम
सितंबर की तेजी मुख्य रूप से इंफ्रास्ट्रक्चर और कच्चे माल की मांग से आई है। आयरन ओर का उत्पादन 18.4% बढ़कर सबसे आगे रहा, जो घरेलू स्टील कंपनियों की मजबूत मांग को दर्शाता है। बिजली उत्पादन में 11.4% और कोयला उत्पादन में 10.7% का उछाल देखा गया। यह आंकड़े बताते हैं कि सरकारी और निजी निर्माण कार्यों में तेजी के चलते पावर और कच्चे माल की खपत बनी हुई है।
कहाँ रही चुनौतियां?
ग्रोथ के इन आंकड़ों के बीच कुछ सेक्टरों में सुस्ती भी दिखी है। फर्टिलाइजर उत्पादन में 11.7% की बड़ी गिरावट आई है। साथ ही, एनर्जी मिक्स पर भी दबाव देखा गया, जहाँ नेचुरल गैस 4.6% और कच्चा तेल 1.4% नीचे लुढ़क गए। ये आंकड़े एनर्जी और केमिकल सेक्टर में सप्लाई चेन की बाधाओं की ओर इशारा करते हैं।
पहली छमाही (H1) का हाल
चालू फाइनेंशियल ईयर की पहली छमाही (अप्रैल से सितंबर) की बात करें, तो कोर सेक्टर की कुल ग्रोथ 5.1% रही है। यह पिछले साल की समान अवधि की 2.5% ग्रोथ के मुकाबले काफी बेहतर है। अब निवेशकों की नजरें IIP के आगामी आंकड़ों पर टिकी हैं, जिससे यह साफ होगा कि कोर सेक्टर की यह तेजी मैन्युफैक्चरिंग रिकवरी में कितनी तब्दील हो पा रही है।
