भारत के आठ कोर सेक्टर की ग्रोथ अगस्त महीने में गिरकर **4.8%** के तीन महीने के निचले स्तर पर पहुंच गई है। कोयला, कच्चा तेल और नेचुरल गैस के उत्पादन में आई कमी इसका मुख्य कारण है। हालांकि, सीमेंट और बिजली सेक्टर में अभी भी दम दिख रहा है, लेकिन बढ़ते एनर्जी खर्च कंपनियों के मार्जिन पर दबाव डाल सकते हैं।
देश की औद्योगिक सेहत को दर्शाने वाला 'कोर सेक्टर आउटपुट' अगस्त में सुस्त पड़ गया है। यह विकास दर पिछले 3 महीनों में सबसे निचली है, जबकि जुलाई में यह 5% थी। कोर सेक्टर के ये आठ उद्योग भारत के कुल इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन (IIP) का करीब 40.3% हिस्सा कवर करते हैं, इसलिए इनका डेटा देश की पूरी औद्योगिक तस्वीर को बयां करता है।
सुस्ती की मुख्य वजह: एनर्जी क्राइसिस
विकास दर में गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजह एनर्जी सेक्टर का प्रदर्शन रहा। आंकड़ों पर नजर डालें तो:
- नेचुरल गैस का उत्पादन 4.9% गिर गया है।
- कोयला उत्पादन में 3.8% की कमी आई है।
- कच्चे तेल (Crude Oil) का उत्पादन 3.6% घट गया है।
एनालिस्ट्स का मानना है कि वेस्ट एशिया में जारी तनाव के कारण सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है, जिसका असर कमोडिटी पर आधारित उद्योगों पर पड़ रहा है।
कहाँ दिखी चमक?
बुरी खबरों के बीच इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े सेक्टर ने मजबूती दिखाई है। सीमेंट उत्पादन 12.5% उछला है, जो सरकार के कैपिटल एक्सपेंडिचर और निर्माण गतिविधियों में तेजी को दिखाता है। वहीं, बिजली उत्पादन में 11.6% की बढ़त रही, जो इंडस्ट्रियल और रेजिडेंशियल डिमांड को मजबूती दे रही है। स्टील सेक्टर में 3.4% की धीमी लेकिन सकारात्मक ग्रोथ दर्ज की गई।
निवेशकों के लिए चेतावनी
फर्टिलाइजर सेक्टर में 12.4% की गिरावट आई है, जो लगातार छठे महीने की कमजोरी है। निवेशकों के लिए असली चिंता का विषय कॉर्पोरेट प्रॉफिट मार्जिन है। अगर एनर्जी इनपुट्स की सप्लाई में अनिश्चितता बनी रहती है, तो कंपनियों की ऑपरेशनल कॉस्ट बढ़ सकती है। यदि कंपनियां बढ़ी हुई लागत को ग्राहकों पर नहीं डाल पाईं, तो उनके मुनाफे पर दबाव आना तय है। अब बाजार की नजरें सरकार के खर्च और ग्लोबल एनर्जी प्राइसेज पर टिकी हैं, जो सीधे तौर पर इन क्षेत्रों की कंपनियों को प्रभावित करेंगी।
