Core Sector Data: भारत की इकोनॉमी की रफ्तार सुस्त, कोर सेक्टर ग्रोथ **4.8%** पर फिसली

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AuthorNeha Patil|Published at:
Core Sector Data: भारत की इकोनॉमी की रफ्तार सुस्त, कोर सेक्टर ग्रोथ **4.8%** पर फिसली

अगस्त 2026 में भारत के कोर सेक्टर की ग्रोथ लगातार दूसरे महीने घटकर **4.8%** पर आ गई है, जो तीन महीनों का निचला स्तर है। जहां सीमेंट और बिजली सेक्टर में तेजी बनी हुई है, वहीं कोयला, नेचुरल गैस और फर्टिलाइजर सेक्टर में आई गिरावट ने आंकड़ों पर दबाव डाल दिया है।

कंस्ट्रक्शन सेक्टर की चमक बरकरार

आंकड़ों पर गौर करें तो अगस्त में सीमेंट प्रोडक्शन में 12.5% का उछाल दर्ज किया गया है। इसके अलावा, बिजली उत्पादन भी बढ़कर 11.6% रहा है, जो जुलाई में 8.4% था। यह संकेत देता है कि देश में इंफ्रास्ट्रक्चर और कंस्ट्रक्शन से जुड़ी डिमांड अभी भी मजबूत बनी हुई है। सरकार का कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) भी रफ्तार पकड़ रहा है, जहां FY2027 के ₹12.2 लाख करोड़ के लक्ष्य का 36% हिस्सा जुलाई तक इस्तेमाल हो चुका है। स्टील आउटपुट में भी 3.4% की बढ़ोतरी दिखी है, हालांकि इसकी रफ्तार पिछले साल के मुकाबले अभी भी काफी कम है।

एनर्जी सेक्टर बना चिंता का विषय

ग्रोथ घटने के पीछे सबसे बड़ा कारण एनर्जी और फर्टिलाइजर सेक्टर का खराब प्रदर्शन है। कोयला उत्पादन में 3.8% की गिरावट आई है, जबकि जुलाई में इसमें 7.6% की बढ़त थी। नेचुरल गैस का प्रोडक्शन 4.9% और क्रूड ऑयल का प्रोडक्शन 3.6% घटा है। सबसे बुरा हाल फर्टिलाइजर सेक्टर का रहा, जिसमें 12.4% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।

बाजार के लिए क्या हैं संकेत?

यह लगातार दूसरा महीना है जब कोर सेक्टर की ग्रोथ में सुस्ती आई है। हालांकि, यह किसी व्यापक इंडस्ट्रियल मंदी का संकेत नहीं है, लेकिन विकास की रफ्तार अब असमान (Uneven) हो गई है। निवेशकों के लिए असली सवाल यह है कि क्या आने वाले समय में कंस्ट्रक्शन से मिलने वाली मजबूती, एनर्जी सेक्टर की सुस्ती की भरपाई कर पाएगी? बाजार की निगाहें अब इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन के अगले आंकड़ों पर टिकी हैं ताकि यह साफ हो सके कि मंदी का असर सिर्फ कोर इंडस्ट्रीज तक सीमित है या इसका दायरा बढ़ रहा है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.