सितंबर 2026 में भारत के कोर इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर ने **7.9%** की शानदार ग्रोथ दर्ज की है, जो पिछले साल के **3.1%** के आंकड़े के मुकाबले काफी बेहतर है। सरकारी खर्च के दम पर बिजली, रिफाइनरी और स्टील सेक्टर में जबरदस्त तेजी देखने को मिली है।
भारत के कोर इंफ्रास्ट्रक्चर उद्योग, जो कुल इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन (IIP) का 40% से ज्यादा हिस्सा हैं, सितंबर में काफी मजबूत दिखे। यह अगस्त के 5.9% के मुकाबले एक बड़ा सुधार है और पिछले साल के 3.1% की तुलना में औद्योगिक गतिविधि में साफ तेजी को दर्शाता है।\n\nइस विकास के पीछे सरकारी कैपिटल स्पेंडिंग का बड़ा हाथ है। बड़े पैमाने पर चल रहे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के कारण बिजली क्षेत्र में 11.4% और रिफाइनरी आउटपुट में 10.3% की उछाल आई है। यह देश भर में बढ़ती बिजली और ईंधन की मांग को दिखाता है।\n\nइसके अलावा कोयला उत्पादन में 10.7%, स्टील उत्पादन में 4.9% की ग्रोथ हुई है। खास बात यह है कि कोर इंडेक्स में हाल ही में शामिल हुए आयरन ओर (Iron Ore) का उत्पादन 18.4% बढ़ा है, जो घरेलू मांग को मजबूती दे रहा है।\n\nहालांकि, अर्थव्यवस्था के कुछ हिस्सों में चुनौतियां भी बरकरार हैं। ग्लोबल सप्लाई चेन में उतार-चढ़ाव के कारण नेचुरल गैस में 4.6% और कच्चे तेल के उत्पादन में 1.4% की गिरावट दर्ज की गई है। सबसे ज्यादा असर फर्टिलाइजर सेक्टर पर पड़ा है, जहां उत्पादन 11.7% गिर गया है। वेस्ट एशिया में चल रहे तनाव के कारण रॉ मटेरियल की लागत और आपूर्ति में आ रही दिक्कतों का असर इन उद्योगों पर साफ दिख रहा है।\n\nनिवेशकों के लिए, बिजली और रिफाइनरी सेक्टर में आई तेजी औद्योगिक मांग का एक पॉजिटिव संकेत है। सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर पुश फिलहाल भारतीय अर्थव्यवस्था को ग्लोबल सुस्ती से बचा रहा है, लेकिन फर्टिलाइजर और एनर्जी सेगमेंट में दिख रही गिरावट पर नजर रखना जरूरी होगा।
