भारत सरकार अब बनाना प्लांटेशन सेक्टर में विदेशी निवेश (FDI) की अनुमति देने पर विचार कर रही है। इस कदम का मकसद देश में केले के उत्पादन और निर्यात के बीच के अंतर को कम करना और कोल्ड चेन इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाना है।
एक्सपोर्ट बढ़ाने की बड़ी योजना
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय फिलहाल इस प्रस्ताव पर स्टेकहोल्डर्स के साथ चर्चा कर रहा है कि क्या बनाना प्लांटेशन सेक्टर को विदेशी निवेश के लिए खोला जाना चाहिए। अभी भारत में चाय, कॉफी, रबर और पाम ऑयल जैसे सेक्टर में 100% FDI ऑटोमैटिक रूट से मिलता है, लेकिन अन्य बागवानी फसलों पर अभी पाबंदियां हैं।
भारत दुनिया का सबसे बड़ा केला उत्पादक है, जिसकी हिस्सेदारी वैश्विक उत्पादन में करीब 26% है। हालांकि, ग्लोबल एक्सपोर्ट मार्केट में भारत की हिस्सेदारी मात्र 1% है। फाइनेंशियल ईयर 2024-25 में भारत का बनाना एक्सपोर्ट $377.5 मिलियन रहा, जिसमें 30% की सालाना बढ़ोतरी देखी गई। सरकार का लक्ष्य इसे $1 बिलियन तक पहुंचाना है।
इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स की चुनौतियां
FDI आने से भले ही विदेशी पूंजी और आधुनिक तकनीक के रास्ते खुलें, लेकिन राह आसान नहीं है। केले जैसी खराब होने वाली फसलों के लिए कोल्ड स्टोरेज और बेहतर लॉजिस्टिक्स की जरूरत होती है। फिलहाल, उच्च परिवहन लागत और रेफ्रिजरेटेड स्टोरेज की कमी बड़ी बाधा बनी हुई है। इसके अलावा, भारत में भूमि अधिग्रहण और मालिकाना हक के नियम भी काफी जटिल हैं।
किन राज्यों पर रहेगी नजर?
देश का 67% केला उत्पादन मुख्य रूप से आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश में होता है। अगर विदेशी कंपनियां आती हैं, तो इन राज्यों में क्वालिटी स्टैंडर्ड्स सुधर सकते हैं। निवेशकों के लिए वे कंपनियां खास होंगी, जो पहले से ही कोल्ड चेन, फूड प्रोसेसिंग या एग्री-लॉजिस्टिक्स सेक्टर में इन राज्यों में मजबूत पकड़ रखती हैं।
