भारत के प्राइवेट सेक्टर की गतिविधियों में सितंबर महीने में जबरदस्त उछाल देखा गया है। कंपोजिट PMI बढ़कर **56.5** के स्तर पर पहुंच गया है, जो चार महीनों का उच्चतम स्तर है।
भारत के प्राइवेट सेक्टर ने सितंबर में शानदार तेजी दर्ज की है। HSBC Flash India Composite PMI अगस्त के 54.3 से बढ़कर 56.5 हो गया है। PMI का 50 के ऊपर रहना विस्तार को दर्शाता है, और यह जून के बाद से अब तक का सबसे बड़ा उछाल है।
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर बना इंजन
इस तेजी की मुख्य वजह मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर है, जिसका PMI 52.8 से बढ़कर 55.7 पर पहुंच गया है। इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स और इंडस्ट्रियल मेटल्स जैसे सेक्टरों में जबरदस्त मांग दिख रही है। मिडिल ईस्ट में जारी भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) के कारण सप्लाई चेन में आ रही दिक्कतों को देखते हुए कंपनियां अपना इन्वेंट्री लेवल बढ़ा रही हैं। हालांकि, निवेशकों को ध्यान रखना चाहिए कि ज्यादा इन्वेंट्री रखने से वर्किंग कैपिटल पर दबाव बढ़ सकता है।
एक्सपोर्ट का मोर्चे पर चिंता
घरेलू बाजार जहां मजबूती दिखा रहा है, वहीं अंतरराष्ट्रीय व्यापार (International Trade) के मोर्चे पर मुश्किलें दिख रही हैं। नए एक्सपोर्ट ऑर्डर्स की ग्रोथ 3 साल के निचले स्तर पर आ गई है। यह सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए एक बड़ी चुनौती है, जो ग्लोबल मार्केट के उतार-चढ़ाव से सीधे प्रभावित हो रहे हैं।
क्या है मुनाफे का गणित?
इनपुट कॉस्ट (Input Cost) के मामले में स्थिति मिली-जुली है। कुल इनपुट कॉस्ट जनवरी के बाद से सबसे निचले स्तर पर है, जो मार्जिन्स के लिए अच्छी खबर हो सकती है। लेकिन, कच्चे माल और फ्यूल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण मैन्युफैक्चरर्स को अपने सामान के दाम बढ़ाने पड़ रहे हैं। आने वाले दिनों में कंपनियों के क्वार्टरली रिजल्ट्स यह साफ कर देंगे कि बढ़ी हुई प्रोडक्शन एक्टिविटी क्या वास्तव में बेहतर प्रॉफिट में बदल रही है, या बढ़ती लागत मुनाफे को दबा रही है।
