Climate Crisis: भारत में बिगड़े हालात, 16,000 से ज्यादा मौतें और बर्बाद हुई करोड़ों हेक्टेयर फसल

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AuthorNeha Patil|Published at:
Climate Crisis: भारत में बिगड़े हालात, 16,000 से ज्यादा मौतें और बर्बाद हुई करोड़ों हेक्टेयर फसल

साल 2022 से 2026 के बीच भारत ने भीषण मौसम की मार झेली है। नए आंकड़ों के मुताबिक, इस जलवायु अस्थिरता के कारण **16,303** लोगों की जान गई और **2.06 करोड़** हेक्टेयर से अधिक फसल बर्बाद हो गई है, जो सीधे तौर पर देश की महंगाई और ग्रामीण आय को प्रभावित कर रही है।

भारत में जलवायु पैटर्न में आया बदलाव अब सीधे तौर पर देश की इकोनॉमी को चोट पहुंचा रहा है। 'सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट' की रिपोर्ट के अनुसार, 2022 से 2026 के बीच करीब 99 फीसदी दिन चरम मौसमी घटनाओं वाले रहे। इन पांच सालों में 16,303 लोगों ने अपनी जान गंवाई, जिसमें सिर्फ 2025 में 4,064 मौतें दर्ज की गईं। 2026 की बात करें तो पहले 273 दिनों में से 251 दिन खतरनाक मौसम के रहे हैं।

कृषि पर गहरा असर

भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले कृषि सेक्टर पर इसका सबसे बुरा प्रभाव पड़ा है। लू, बाढ़ और चक्रवाती तूफानों के कारण 2.06 करोड़ हेक्टेयर से अधिक की फसल नष्ट हुई है। फसल की पैदावार में कमी से सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ रहा है, जो सीधे तौर पर खाने-पीने की चीजों की कीमतों को बढ़ाकर महंगाई को ऊपर ले जा रहा है।

निवेशकों के लिए जोखिम

बाजार के जानकारों के लिए ये क्लाइमेट डेटा अब बेहद जरूरी हो गया है। जब बड़े पैमाने पर जमीन प्रभावित होती है, तो एग्रो-बेस्ड इंडस्ट्रीज की सप्लाई चेन टूट जाती है। इसके अलावा, फसल खराब होने से ग्रामीण इलाकों में कमाई घटती है, जिसका असर कंज्यूमर गुड्स की डिमांड पर भी पड़ता है। अब भविष्य में क्लाइमेट-रेजिलिएंट फार्मिंग और इंश्योरेंस फ्रेमवर्क ही अर्थव्यवस्था को इन झटकों से बचाने का जरिया बनेंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.