Heatwaves: अब आपदा घोषित, राज्यों को मिलेगा पूरा फंड; इकोनॉमी पर क्या होगा असर?

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Heatwaves: अब आपदा घोषित, राज्यों को मिलेगा पूरा फंड; इकोनॉमी पर क्या होगा असर?

सरकार ने आधिकारिक तौर पर हीटवेव और बिजली गिरने की घटनाओं को नेचुरल डिजास्टर घोषित कर दिया है। इस बदलाव से राज्य अब डिजास्टर रिलीफ फंड का पूरा इस्तेमाल कर सकेंगे। यह फैसला 16वें फाइनेंस कमीशन की सिफारिशों के अनुरूप है, जिसका लक्ष्य क्लाइमेट से जुड़े आर्थिक खतरों को कम करना है।

केंद्र सरकार के इस बड़े नीतिगत बदलाव के बाद, राज्य सरकारें अब स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फंड (SDRF) और स्टेट डिजास्टर मिटिगेशन फंड (SDMF) का पूरा उपयोग राहत और बचाव कार्यों के लिए कर सकेंगी। पहले स्थानीय आपदाओं के लिए इन फंडों के इस्तेमाल पर 10% की सीमा थी, जिसे अब पूरी तरह हटा दिया गया है।

आर्थिक चुनौतियों पर RBI की चेतावनी

यह फैसला 16वें फाइनेंस कमीशन (2026-2031) की सिफारिशों के आधार पर लिया गया है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने चेतावनी दी है कि भीषण गर्मी का असर लंबे समय तक रहने वाला है। अनुमान है कि कृषि, निर्माण और असंगठित क्षेत्रों में लेबर प्रोडक्टिविटी घटने के कारण 2030 तक देश की GDP को 4.5% तक का नुकसान हो सकता है।

निवेशकों के लिए संकेत

बाजार और निवेशकों के लिए यह खबर काफी अहम है। पावर और यूटिलिटी कंपनियों पर दबाव बढ़ सकता है क्योंकि भीषण गर्मी में बिजली की मांग में भारी उछाल आता है, जिससे ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर की परीक्षा होगी। वहीं, ग्रामीण अर्थव्यवस्था या माइक्रोफाइनेंस में सक्रिय बैंकों और NBFCs के लिए यह क्रेडिट स्ट्रेस का कारण बन सकता है, क्योंकि गर्मी से प्रभावित किसानों और मजदूरों की कमाई पर असर पड़ने की आशंका है।

फिलहाल, सरकार का पूरा फोकस 'हीट एक्शन प्लान' को लागू करने पर है। देखना यह होगा कि राज्य इस फंड का इस्तेमाल क्लाइमेट-रेसिस्टेंट इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने में कितनी तेजी से करते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.