India-China Trade: चीन पर बढ़ती निर्भरता से भारतीय मैन्युफैक्चरिंग के लिए बढ़ा रिस्क

ECONOMY
Whalesbook Logo
AuthorMehul Desai|Published at:
India-China Trade: चीन पर बढ़ती निर्भरता से भारतीय मैन्युफैक्चरिंग के लिए बढ़ा रिस्क

एक नई रिपोर्ट के अनुसार, भारत अब **71** क्रिटिकल गुड्स के लिए चीन पर **80%** से ज्यादा निर्भर है। फाइनेंशियल ईयर **2026** में द्विपक्षीय ट्रेड डेफिसिट बढ़कर **$112.1 बिलियन** के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, जो घरेलू कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन के लिए एक बड़ा खतरा है।

कोआन एडवाइजरी ग्रुप और इंस्टीट्यूट ऑफ चाइनीज स्टडीज की एक हालिया रिपोर्ट ने भारतीय इंडस्ट्री के सामने खड़े बड़े संकट को उजागर किया है। फाइनेंशियल ईयर 2019 में भारत केवल 46 प्रोडक्ट कैटेगरी के लिए चीन पर निर्भर था, लेकिन यह संख्या अब बढ़कर 71 हो गई है। यह स्पष्ट संकेत है कि पिछले सात वर्षों में भारत की औद्योगिक निर्भरता कम होने के बजाय और गहरी हुई है।

इलेक्ट्रॉनिक्स और ग्रीन टेक पर असर

सबसे ज्यादा चिंता इलेक्ट्रॉनिक्स और एनर्जी सेक्टर (HS Chapter 85) में है। इस अकेले सेक्टर ने कुल $112.1 बिलियन के ट्रेड डेफिसिट में $43.1 बिलियन का योगदान दिया है। इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) और एनर्जी स्टोरेज मार्केट में स्थिति और भी गंभीर है, जहां भारत की 83.6% लिथियम-आयन बैटरी की आपूर्ति चीन से हो रही है, जिसकी वैल्यू लगभग $3.9 बिलियन है। सेमीकंडक्टर सेगमेंट में भी चीन की बाजार हिस्सेदारी 48.9% बनी हुई है।

भारतीय निवेशकों के लिए यह सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि एक स्ट्रक्चरल कमजोरी है। कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटो पार्ट्स बनाने वाली कई भारतीय कंपनियां असेंबलिंग के लिए चीनी पार्ट्स पर निर्भर हैं। जियोपॉलिटिकल तनाव या सप्लाई चेन में किसी भी तरह की बाधा सीधे इन कंपनियों के प्रोडक्शन और मुनाफे पर असर डाल सकती है।

सरकारी योजना और निवेशकों के लिए संकेत

इस स्थिति को बदलने के लिए सरकार ने $51 बिलियन का इम्पोर्ट सब्स्टीट्यूशन प्लान शुरू किया है, जिसका लक्ष्य करीब 100 उत्पादों को स्थानीय स्तर पर तैयार करना है। हालांकि, स्थानीय क्षमता विकसित करने में समय और भारी कैपिटल एक्सपेंडिचर की जरूरत होगी।

निवेशकों को अब यह देखना होगा कि घरेलू मैन्युफैक्चरर्स कितनी जल्दी लोकल सोर्सिंग अपनाते हैं। शॉर्ट टर्म में, घरेलू विकल्प महंगे होने के कारण कंपनियों के ऑपरेटिंग मार्जिन पर दबाव दिख सकता है। आने वाली तिमाहियों में सरकारी नीतियों के असर और कंपनियों की लोकलाइजेशन स्पीड पर नजर रखना बेहद जरूरी होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.