India-Chile Trade Pact: लिथियम और कॉपर की राह में अड़चन, क्या EV सेक्टर को होगा झटका?

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AuthorMehul Desai|Published at:
India-Chile Trade Pact: लिथियम और कॉपर की राह में अड़चन, क्या EV सेक्टर को होगा झटका?

भारत और चिली के बीच **2026** तक होने वाले ट्रेड एग्रीमेंट की बातचीत एक नाजुक दौर में है। भारत अपने EV और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर के लिए लिथियम और कॉपर की सप्लाई चेन को सुरक्षित करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन चिली की घरेलू रेगुलेटरी नीतियों के कारण मामला फंसा हुआ है।

भारत और चिली के बीच प्रस्तावित Comprehensive Economic Partnership Agreement (CEPA) को 2026 के अंत तक अंतिम रूप देने की कोशिश की जा रही है। लेकिन, भारत की ओर से क्रिटिकल मिनरल्स (खासकर लिथियम और कॉपर) के लिए विशेष एक्सेस की मांग सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है।

क्या है पूरा विवाद?

भारत एक बड़ी डील की तैयारी में है, जहाँ भारतीय बाजार चिली के निर्यातकों के लिए खोला जाएगा, लेकिन बदले में भारत को इन खनिजों पर प्राथमिकता चाहिए। चिली फिलहाल अपने घरेलू माइनिंग नियमों और कृषि उत्पादों (जैसे सैल्मन और अखरोट) के लिए भारतीय बाजार में बेहतर पहुंच चाहता है। यह रणनीतिक संतुलन दोनों देशों के लिए एक बड़ी चुनौती है।

क्यों जरूरी है यह डील?

भारत के क्लीन एनर्जी और EV मैन्युफैक्चरिंग लक्ष्यों के लिए यह मिनरल्स ऑक्सीजन की तरह हैं। 2025 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार $5.38 बिलियन तक पहुंच गया है, लेकिन फिलहाल पलड़ा चिली के निर्यात के पक्ष में झुका हुआ है। बिना किसी सरकारी समझौते के, भारतीय मैन्युफैक्चरर्स को ग्लोबल मार्केट में कीमतों की भारी उठापटक और सप्लाई चेन के संकट से जूझना पड़ सकता है।

प्राइवेट सेक्टर की सक्रियता

सरकारी स्तर पर बातचीत जारी रहने के बीच, बड़ी भारतीय कंपनियां खुद कदम उठा रही हैं। Coal India Ltd ने चिली में माइनिंग अवसरों को तलाशना शुरू कर दिया है। वहीं, Adani Enterprises की यूनिट Kutch Copper चिली की सरकारी माइनिंग कंपनी Codelco के साथ जुड़कर कच्चा माल हासिल करने की कोशिश में है। यह साफ है कि भारतीय फर्में कूटनीतिक नतीजों का इंतजार किए बिना सप्लाई रिस्क को कम करने की तैयारी में हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.