भारत और Chile ने CEPA (Comprehensive Economic Partnership Agreement) के लिए औपचारिक बातचीत शुरू कर दी है। दोनों देशों के बीच मौजूदा व्यापार **$5.6 बिलियन** के पार पहुंच चुका है, और इस डील का मकसद ट्रेड बैरियर्स को कम करना है।
भारत और Chile के बीच CEPA पर बातचीत शुरू होना दोनों देशों के इकोनॉमिक रिश्तों में एक बड़ा बदलाव ला सकता है। मौजूदा समय में दोनों देशों के बीच $5.6 बिलियन का सालाना व्यापार होता है, जिसे अब एक व्यवस्थित फ्रेमवर्क के जरिए और बढ़ाने की तैयारी है। यह डील सिर्फ सामान के आयात-निर्यात तक सीमित नहीं है, बल्कि सर्विसेज और निवेश के नियमों को भी आसान बनाएगी।
क्रिटिकल मिनरल्स पर नजर
निवेशकों के लिए सबसे बड़ी खबर यह है कि Chile दुनिया में लिथियम और कॉपर का सबसे बड़ा उत्पादक है। ये दोनों ही चीजें भारत के इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर के लिए रीढ़ की हड्डी के समान हैं। अगर यह डील सफल होती है, तो भारतीय बैटरी मैन्युफैक्चरर्स और सोलर कंपनियों को कम लागत पर कच्चा माल मिल सकेगा, जो उनके मुनाफे में सीधा योगदान देगा।
Tamil Nadu बनेगा मैन्युफैक्चरिंग हब
Chile के अधिकारियों ने विशेष रूप से Tamil Nadu को भविष्य के आर्थिक सहयोग के लिए चुना है। चेन्नई की पोर्ट कनेक्टिविटी और ऑटो-एंसिलरी सेक्टर में राज्य की पकड़ को देखते हुए यह कदम बेहद रणनीतिक माना जा रहा है। आने वाले समय में Tamil Nadu के मैन्युफैक्चरिंग कॉरिडोर में निवेश और व्यापार के नए दरवाजे खुल सकते हैं।
जोखिम और चुनौतियां
हालांकि, ट्रेड डील की राह आसान नहीं होती। बातचीत लंबी खिंच सकती है और इसमें कई पेचीदा समझौते शामिल होते हैं। निवेशकों को यह देखना होगा कि किन सेक्टर्स में टैरिफ कटौती होती है, क्योंकि कुछ घरेलू उद्योगों को आयातित सामानों से प्रतिस्पर्धा का सामना भी करना पड़ सकता है। फिलहाल, मार्केट पार्टिसिपेंट्स को सरकार की तरफ से आने वाली अगली अपडेट और फाइनल शर्तों पर नजर रखनी चाहिए।
