सरकार ने कैंसर की नॉन-शेड्यूल्ड दवाओं पर ट्रेड मार्जिन को **30%** तक सीमित कर दिया है। इस कदम से मरीजों का खर्च **70%** तक कम होने और आम जनता के **₹2,500 करोड़** सालाना बचने की उम्मीद है।
भारत सरकार ने कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली नॉन-शेड्यूल्ड दवाओं के ट्रेड मार्जिन को MRP के 30% पर कैप कर दिया है। NPPA की 151वीं बैठक के बाद लिए गए इस फैसले का मुख्य उद्देश्य मरीजों के इलाज का बोझ कम करना है। सरकार के अनुमान के मुताबिक, इससे मरीजों के बिल में 70% तक की भारी कमी आ सकती है और कुल मिलाकर देश के परिवारों के ₹2,500 करोड़ सालाना बचेंगे।\n\n### भारी मुनाफे पर रोक\nयह रेगुलेशन इसलिए आया क्योंकि डेटा में सामने आया था कि कुछ कैंसर दवाओं पर मैन्युफैक्चरिंग से लेकर मरीज तक पहुंचने के बीच 700% तक का मार्क-अप लिया जा रहा था। Drugs (Prices Control) Order, 2013 के पैरा 19 का इस्तेमाल करते हुए अब इस प्राइस गैप को खत्म किया जा रहा है।\n\n### इन्वेस्टर्स के लिए चिंता\nबाजार में चर्चा इस बात की है कि क्या यह दायरा आगे बढ़ेगा। सुप्रीम कोर्ट इस समय इलाज की बढ़ती लागत पर सुनवाई कर रहा है और कोर्ट ने सवाल उठाए हैं कि क्यों इस तरह का मार्जिन कैप कार्डियक स्टेंट और अन्य जरूरी हॉस्पिटल कंज्यूमेबल्स पर लागू नहीं होना चाहिए।\n\nएनालिस्ट्स का मानना है कि अगर यह नियम बड़े स्तर पर हॉस्पिटल डिवाइसेस पर लागू होता है, तो प्राइवेट हॉस्पिटल चेन्स के EBITDA पर 1% से 2% का असर पड़ सकता है। फिलहाल, प्राइवेट हॉस्पिटल चेन्स इन नॉन-शेड्यूल्ड डिवाइसेस पर मिलने वाले मार्जिन से अपना ऑपरेशनल खर्च निकालती हैं।\n\n### आगे क्या होगा?\nअगले 2 हफ्तों में DGHS के तहत बनी एक्सपर्ट कमिटी उन दवाओं की लिस्ट फाइनल करेगी जो इस कैप के दायरे में आएंगी। साथ ही, 27 अक्टूबर, 2026 को सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई तय है, जो तय करेगी कि आने वाले समय में हेल्थकेयर सेक्टर में रेगुलेटरी सख्ती और कितनी बढ़ेगी।
