भारत और कनाडा के बीच ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर 5 अक्टूबर से बातचीत का पांचवां दौर शुरू होने जा रहा है। दोनों देशों का लक्ष्य 2026 के अंत तक डील फाइनल करना और 2030 तक आपसी व्यापार को **$30.4 बिलियन** से बढ़ाकर **$70 बिलियन** तक ले जाना है।
भारत और कनाडा के बीच 'कॉम्प्रीहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट' (CEPA) को लेकर बातचीत तेज हो गई है। 18 सितंबर को चौथे दौर की बातचीत खत्म होने के बाद, अब 5 अक्टूबर से पांचवें दौर की चर्चा शुरू होगी। सरकार का लक्ष्य 2026 के अंत तक इसे अंतिम रूप देना है।
एक्सपोर्ट और इंपोर्ट पर असर
इस डील से भारतीय निर्यातकों के लिए नए रास्ते खुलने की उम्मीद है। अभी भारत कनाडा को मुख्य रूप से फार्मास्यूटिकल्स, आयरन और स्टील, समुद्री भोजन, कॉटन गारमेंट्स और इलेक्ट्रॉनिक सामान भेजता है। वहीं, कनाडा भारत को दालें, कोयला, फर्टिलाइजर्स, क्रूड पेट्रोलियम और जेमस्टोन्स की सप्लाई करता है।
टेक्नोलॉजी सेक्टर के लिए अहम
इस एग्रीमेंट में सर्विसेज सेक्टर, खासकर भारतीय टेक्नोलॉजी कंपनियों की भूमिका अहम होगी। टेलीकम्युनिकेशन, कंप्यूटर और प्रोफेशनल सर्विसेज का बड़ा मार्केट कनाडा में है। अगर रेगुलेटरी रूल्स सरल होते हैं, तो इन कंपनियों के लिए वहां बिजनेस करना और आसान हो जाएगा। हालांकि, निवेशकों को ध्यान रखना होगा कि सरकारें अभी ब्रॉड लक्ष्यों पर बात कर रही हैं, असली फायदा टैरिफ में कटौती और मार्केट एक्सेस की शर्तों पर निर्भर करेगा।
अन्य ट्रेड डील्स पर भी फोकस
भारत सिर्फ कनाडा ही नहीं, बल्कि यूरोपियन यूनियन के साथ भी ट्रेड डील पर तेजी से काम कर रहा है। आने वाले महीनों में यूरोपियन पार्लियामेंट में इसे मंजूरी मिलने की उम्मीद है। ये कदम भारत के ग्लोबल ट्रेड फुटप्रिंट को मजबूत करने की कोशिश का हिस्सा हैं। निवेशकों को अब केवल राजनीतिक वादों पर ही नहीं, बल्कि आने वाले समय में होने वाली konkrete (ठोस) प्रगति और मार्केट एक्सेस की डीटेल्स पर नजर रखनी चाहिए।
