भारत और कनाडा ने 2026 तक कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (CEPA) को फाइनल करने का लक्ष्य रखा है। इस ट्रेड डील से दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार में **$6.5 बिलियन** का इजाफा होने की उम्मीद है, जिसका मुख्य फोकस AI, एविएशन और क्वांटम कंप्यूटिंग पर है।
भारत और कनाडा ने कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (CEPA) को अंतिम रूप देने के लिए 2026 की समय सीमा तय की है। इस ट्रेड फ्रेमवर्क का मकसद न केवल गुड्स और सर्विसेज के लिए मार्केट एक्सेस को बढ़ाना है, बल्कि इन्वेस्टमेंट और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी से जुड़े नियमों को भी अपडेट करना है।
फोकस एरिया और इन्वेस्टमेंट
इस एग्रीमेंट का मुख्य जोर हाई-ग्रोथ टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर पर है। दोनों देशों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्वांटम कंप्यूटिंग और स्मार्ट मोबिलिटी को सहयोग के मुख्य क्षेत्रों के रूप में चुना है। एविएशन इंफ्रास्ट्रक्चर भी प्राथमिकता में है, जहां कनाडाई पूंजी पहले से ही मौजूद है। उदाहरण के तौर पर, Fairfax Financial जैसी कंपनियों ने बेंगलुरु एयरपोर्ट हब में बड़े निवेश कर रखे हैं, जो भारत में कनाडाई निवेश का एक सटीक उदाहरण है।
निवेशकों के लिए क्यों है अहम?
निवेशकों के नजरिए से, यह ट्रेड पैक्ट क्रॉस-बॉर्डर बिजनेस के नियमों को आसान बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। हालांकि, ट्रेड एग्रीमेंट में अक्सर मार्केट एक्सेस, ट्रेड रेमेडीज और लेबर मोबिलिटी जैसे जटिल मुद्दे होते हैं, जिन पर अभी बातचीत जारी है।
ओटावा में बातचीत का पांचवां दौर समाप्त हो चुका है और अगला अपडेट नवंबर में नई दिल्ली में होने वाली बैठक में आएगा। बाजार के जानकार अब इस बात पर नजर बनाए हुए हैं कि ट्रेड रेगुलेशंस और सेक्टर-स्पेसिफिक एक्सेस के अंतिम नतीजे क्या निकलकर सामने आते हैं, क्योंकि इसी पर कंपनियों का भविष्य और निवेश का फ्लो तय होगा।
