नई दिल्ली में भारत और कनाडा के बीच ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर चौथे दौर की बातचीत शुरू हो चुकी है। दोनों देशों का लक्ष्य **2030** तक द्विपक्षीय व्यापार को **$50 बिलियन** के पार ले जाना है, जो फार्मा, टेक्सटाइल और आईटी जैसे सेक्टर के लिए बड़ी खबर है।
भारत और कनाडा ने नई दिल्ली में 'कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट' (CEPA) के लिए फिर से बातचीत का सिलसिला शुरू कर दिया है। 14 सितंबर 2026 से शुरू हुआ यह चौथा राउंड 18 सितंबर 2026 तक चलेगा, जिसका मुख्य मकसद दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश के नियमों को सरल बनाना है।
क्यों है यह डील अहम?
यह कदम एक ऐसे समय पर आया है जब कनाडा अमेरिका के साथ व्यापारिक विवादों और टैरिफ की चुनौतियों से जूझ रहा है। अपनी निर्भरता कम करने के लिए कनाडा अब भारत जैसे बड़े साझेदारों के साथ संबंध मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। वहीं, भारत के लिए यह अपनी एक्सपोर्ट मार्केट को और अधिक स्थिर बनाने का एक बड़ा मौका है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2025-26 के दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार में 8.22% की गिरावट आई थी और यह $7.95 बिलियन पर आ गया था। इस नए समझौते से इस गिरावट को थामने की उम्मीद है।
किन सेक्टरों को होगा फायदा?
निवेशकों की नजरें उन सेक्टरों पर हैं जो इस डील से सीधे तौर पर प्रभावित होंगे। भारत से कनाडा को मुख्य रूप से फार्मास्यूटिकल्स, आयरन, स्टील, टेक्सटाइल और सीफूड का निर्यात होता है। इसके अलावा, आईटी और टेलीकॉम सर्विसेज में भी भारत का पलड़ा भारी है। दूसरी ओर, कनाडा भारत को दालें, कोयला और एनर्जी कमोडिटीज की सप्लाई करता है।
इन्वेस्टमेंट और आगे की राह
इस चर्चा में सिर्फ गुड्स ही नहीं, बल्कि 'बायलैटरल इन्वेस्टमेंट ट्रीटी' पर भी जोर दिया जा रहा है, जिससे एआई (AI), फिनटेक और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे उभरते क्षेत्रों में निवेश सुरक्षित होगा। हालांकि, 2026 के अंत तक इस डील को फाइनल करने का लक्ष्य काफी महत्वाकांक्षी है और ग्लोबल इकोनॉमिक अस्थिरता अभी भी एक बड़ा रिस्क बनी हुई है। बाजार के जानकारों के लिए अब इस एग्रीमेंट का ड्राफ्ट और टैरिफ से जुड़ी घोषणाएं सबसे महत्वपूर्ण ट्रिगर होंगी।
