भारत और कनाडा ने CEPA ट्रेड डील को 2026 के अंत तक पूरा करने के लिए बातचीत तेज कर दी है। द्विपक्षीय व्यापार में आई **8.23%** की गिरावट को थामने और **2030** तक **$70 बिलियन** के लक्ष्य को हासिल करने के लिए यह एक बड़ी पहल है।
ओटावा में 9 अक्टूबर को हुई तकनीकी बातचीत के पांचवें दौर के तुरंत बाद, दोनों देशों के व्यापारिक अधिकारियों ने समझौते को अंतिम रूप देने के लिए कमर कस ली है। इस गति को बनाए रखने के लिए कनाडा ने 30 साल में अपना सबसे बड़ा व्यापारिक मिशन भारत भेजा है, जिसमें करीब 300 प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं।
व्यापार का हाल और लक्ष्य
आर्थिक सहयोग में हालिया सुस्ती के कारण दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2025-26 के दौरान 8.23% गिरकर $7.95 बिलियन रह गया है, जो 2024-25 में $8.7 बिलियन था। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और कनाडा की मैरी एनजी अब नियामक बाधाओं को दूर करने और इंपोर्ट ड्यूटी कम करने पर जोर दे रहे हैं ताकि व्यापार को $70 बिलियन के लक्ष्य तक पहुंचाया जा सके।
फोकस सेक्टर और अवसर
सहयोग के लिए मुख्य रूप से एनर्जी (विशेषकर LNG), क्रिटिकल मिनरल्स, एयरोस्पेस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एग्रीकल्चर सेक्टर की पहचान की गई है। इंटरनेशनल ट्रेड मिनिस्टर मनिंदर सिद्धू के नेतृत्व में यह मिशन 12 से 17 अक्टूबर तक भारत में मौजूद है ताकि नई पार्टनरशिप तैयार की जा सके।
अभी भी हैं चुनौतियां
2026 की डेडलाइन के बावजूद, कुछ बड़े अड़ंगे अब भी बने हुए हैं। सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए वीजा कोटा और एग्रीकल्चर सेक्टर (दाल और डेयरी) का मुद्दा दोनों देशों के बीच बातचीत में 'अड़चन' बना हुआ है। निवेशकों के लिए इस डील का कानूनी ड्राफ्ट और पॉलिसी स्तर पर होने वाली प्रगति पर नजर रखना जरूरी है, क्योंकि इन मतभेदों के सुलझने में देरी होने पर लक्ष्य पीछे खिसक सकता है।
