भारत और कनाडा ने **2026** के अंत तक एक व्यापक ट्रेड एग्रीमेंट को अंतिम रूप देने का लक्ष्य रखा है। टोरंटो में हुई पहली आर्थिक वार्ता में **CAD 70 बिलियन** (करीब **₹4.65 लाख करोड़**) के व्यापार लक्ष्य और UPI को कनाडा में लागू करने पर मंथन हुआ है।
बड़ा ट्रेड लक्ष्य और CEPA
भारत की फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण और कनाडा के फाइनेंस मिनिस्टर फ्रेंकोइस-फिलिप शैम्पेन के बीच टोरंटो में हुई मुलाकात ने भविष्य के आर्थिक संबंधों की दिशा तय कर दी है। दोनों देशों का मुख्य लक्ष्य 2026 के अंत तक 'कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट' (CEPA) को पूरा करना है। इसके जरिए 2030 तक दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को CAD 70 बिलियन (लगभग ₹4.65 लाख करोड़) तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है।
डिजिटल फाइनेंस और UPI का विस्तार
इस बातचीत का सबसे खास पहलू भारत के UPI को कनाडा के बाजार में उतारने की संभावना है। यदि यह योजना सफल होती है, तो दोनों देशों के बीच क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट और रेमिटेंस की लागत में भारी कमी आएगी। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि कनाडा के कड़े बैंकिंग नियमों और कंप्लायंस फ्रेमवर्क के बीच इसे लागू करना एक बड़ी चुनौती होगी, जिस पर अभी काम होना बाकी है।
इन्वेस्टमेंट और क्रिटिकल मिनरल्स
सरकारें एक नए 'बायलैटरल इन्वेस्टमेंट ट्रीटी' (Bilateral Investment Treaty) पर भी काम कर रही हैं ताकि इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स के लिए सुरक्षित माहौल बनाया जा सके। कनाडा के पेंशन फंड पहले से ही भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर और रिन्यूएबल एनर्जी में बड़ा निवेश कर रहे हैं। इसके अलावा, दोनों देशों ने 'क्रिटिकल मिनरल्स' (Critical Minerals) के लिए सप्लाई चेन मजबूत करने पर सहमति जताई है, ताकि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर निर्भरता कम की जा सके।
आगे क्या होगा?
निवेशकों के लिए इस पूरी प्रक्रिया पर नजर रखना जरूरी है। ट्रेड एग्रीमेंट अक्सर जटिल होते हैं और भू-राजनीतिक कारणों से इनमें देरी की संभावना बनी रहती है। UPI के मामले में, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भारतीय फिनटेक कंपनियां और कैनेडियन बैंक कैसे तालमेल बैठाते हैं। साल 2027 में होने वाली अगली वार्ता तय करेगी कि इन वादों ने जमीन पर कितनी प्रगति की है।
