वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कनाडा के दौरे पर हैं, जहाँ दोनों देशों ने **2030** तक **70 अरब कनाडाई डॉलर** के द्विपक्षीय व्यापार का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। इस दौरे का मुख्य फोकस CEPA एग्रीमेंट, UPI का विस्तार और GIFT City में कनाडाई निवेश को आकर्षित करना है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण फिलहाल टोरंटो में भारत-कनाडा इकोनॉमिक एंड फाइनेंशियल डायलॉग के लिए मौजूद हैं। इस तीन दिवसीय दौरे का मकसद दोनों देशों के कूटनीतिक रिश्तों को व्यापारिक और फाइनेंशियल पार्टनरशिप में बदलना है।
ट्रेड एग्रीमेंट और निवेश सुरक्षा
इस बातचीत के केंद्र में Comprehensive Economic Partnership Agreement (CEPA) है। निवेशकों के लिए यह एक अहम पड़ाव है क्योंकि यह ट्रेड के लिए एक स्टेबल लीगल फ्रेमवर्क तैयार करेगा। इसके अलावा, दोनों देश 2026 के अंत तक एक इन्वेस्टमेंट प्रोटेक्शन पैक्ट को अंतिम रूप देने पर काम कर रहे हैं, जिससे भारत में कनाडाई पूंजी का प्रवाह बढ़ने की उम्मीद है।
GIFT City बनेगा हब
सरकार का मुख्य फोकस GIFT City, गुजरात को कनाडाई पेंशन फंड्स के लिए पसंदीदा डेस्टिनेशन बनाना है। कनाडाई फंड्स के पास ग्लोबल स्तर पर भारी एसेट्स हैं, और उन्हें भारत के इन्फ्रास्ट्रक्चर और फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर में निवेश के लिए आमंत्रित किया जा रहा है। इसका मकसद लॉन्ग-टर्म विदेशी पूंजी को सुरक्षित करना है।
डिजिटल पेमेंट का दबदबा
ट्रेड के अलावा, भारत अपने डिजिटल फाइनेंशियल स्टैक, खासकर UPI को कनाडा में ले जाने की तैयारी में है। सरकार चाहती है कि कनाडाई फिनटेक कंपनियां भारतीय पेमेंट प्रोवाइडर्स के साथ मिलकर काम करें, जिससे डिजिटल इकोसिस्टम का विस्तार हो सके।
निवेशकों के लिए राय
भले ही ये लक्ष्य बड़े हैं, लेकिन ट्रेड एग्रीमेंट जैसे CEPA में काफी समय लगता है। निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि अंतिम परिणाम दोनों देशों के रेगुलेटरी तालमेल पर निर्भर करेंगे। बाजार की नजर अब CEPA की बातचीत और इन्वेस्टमेंट प्रोटेक्शन पैक्ट पर बनी रहेगी, जो इस आर्थिक गलियारे की मजबूती का असली पैमाना होंगे।
