महंगाई का करंट: CPI Inflation बढ़कर **5.54%** पर, क्या दिसंबर में फिर बढ़ेंगे ब्याज दरें?

ECONOMY
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AuthorKaran Malhotra|Published at:
महंगाई का करंट: CPI Inflation बढ़कर **5.54%** पर, क्या दिसंबर में फिर बढ़ेंगे ब्याज दरें?

सितंबर में भारत की खुदरा महंगाई दर (Retail Inflation) उछलकर **5.54%** के स्तर पर पहुंच गई है। इसकी मुख्य वजह खाने-पीने की चीजों के बढ़ते दाम हैं। RBI के 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' (Calibrated Tightening) रुख और हालिया रेपो रेट बढ़ोतरी के बाद, HSBC के एक्सपर्ट्स ने दिसंबर में ब्याज दरों में एक और **25 बेसिस पॉइंट** की बढ़ोतरी की चेतावनी दी है।

महंगाई का नया रिकॉर्ड

सितंबर 2026 में कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) आधारित महंगाई दर 5.54% तक पहुंच गई है, जो पिछले करीब 2 साल का उच्चतम स्तर है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने हाल ही में 7 अक्टूबर, 2026 को रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट का इजाफा कर इसे 5.50% कर दिया था। अब केंद्रीय बैंक का रुख 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' की ओर शिफ्ट हो गया है, जिससे यह साफ है कि निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की कोई संभावना नहीं है।

क्यों बेकाबू हो रहे दाम?

महंगाई को हवा देने में फूड बास्केट (Food Basket) का सबसे बड़ा हाथ है। अगस्त के 5.97% के मुकाबले, सितंबर में खाद्य महंगाई दर बढ़कर 7.74% हो गई है। सब्जी, अनाज और खाने के तेल की बढ़ती कीमतों ने आम आदमी का बजट बिगाड़ दिया है। वहीं, कोर इन्फ्लेशन (Core Inflation) भी 4.3% पर आ गई है, जो इस बात का संकेत है कि बढ़ती लागत का असर पूरी अर्थव्यवस्था में फैल रहा है।

आगे क्या होगा?

HSBC के विश्लेषकों का मानना है कि जिस तरह से महंगाई के आंकड़े बने हुए हैं, उसे देखते हुए दिसंबर 2026 की पॉलिसी मीटिंग में RBI एक बार फिर ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर सकता है। हालांकि, भारत की GDP ग्रोथ 7.1% के अनुमान के साथ अभी भी मजबूत बनी हुई है, लेकिन बढ़ते ब्याज दरों का सीधा असर कंपनियों के कर्ज और उनके प्रॉफिट मार्जिन पर पड़ेगा।

निवेशकों के लिए जोखिम

ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार निकलना और भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) भारत के लिए आयात लागत की चुनौती बढ़ा रहे हैं। इसके अलावा, मानसून के अनिश्चित पैटर्न और मौसमी जोखिमों से फूड सप्लाई चैन पर दबाव बना रह सकता है। आने वाले समय में निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि क्या ग्लोबल कमोडिटी की कीमतें स्थिर होती हैं या RBI की सख्ती का दौर और लंबा खिंचता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.