भारत और ब्राजील के बीच सालाना व्यापार **$15.07 अरब** के नए मुकाम पर पहुंच गया है। हालांकि, चीनी और क्रूड ऑयल के बढ़ते आयात से भारत अब सरप्लस से **$1 अरब** के घाटे (Trade Deficit) में आ गया है।
भारत और ब्राजील के बीच व्यापारिक रिश्ते एक बड़े मील के पत्थर पर पहुंच गए हैं। फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में दोनों देशों के बीच कुल ट्रेड वॉल्यूम $15.07 अरब दर्ज किया गया है। यह आंकड़ा दो दशक पहले के $1.5 अरब के मुकाबले करीब 10 गुना ज्यादा है। दोनों देशों ने 2030 तक इस व्यापार को $30 अरब तक ले जाने का लक्ष्य रखा है, जिसमें फार्मास्युटिकल, केमिकल, एनर्जी और डिफेंस सेक्टर पर खास जोर रहेगा।
ट्रेड बैलेंस में बड़ा बदलाव
निवेशकों के लिए सबसे बड़ा अलर्ट ट्रेड बैलेंस में आया बदलाव है। पिछले कुछ सालों में भारत ब्राजील के साथ ट्रेड सरप्लस में था, लेकिन इस बार $1 अरब का डेफिसिट देखने को मिला है। इसकी मुख्य वजह आयात में हुई 48% की भारी बढ़ोतरी है। चीनी (Sugar) और क्रूड ऑयल जैसे कमोडिटीज के बढ़ते इंपोर्ट ने डोमेस्टिक सप्लाई और कंपनियों के मार्जिन को प्रभावित करना शुरू कर दिया है।
भविष्य की राह और BRICS समिट
भारत के लिए ब्राजील फार्मा और केमिकल एक्सपोर्ट्स का एक महत्वपूर्ण बाजार है। हालांकि, रेगुलेटरी मंजूरियां अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। नई दिल्ली में 12-13 सितंबर 2026 को होने जा रही 18वीं BRICS समिट इस दिशा में अहम हो सकती है। उम्मीद है कि इस समिट में व्यापारिक बाधाओं को कम करने और सहयोग बढ़ाने पर बड़ी चर्चा होगी।
निवेशकों के लिए नजरिया
अगले कुछ क्वार्टर में निवेशकों को यह देखना होगा कि क्या सरकार चीनी और एनर्जी जैसे सेक्टर में इंपोर्ट पॉलिसी या टैरिफ में कोई बदलाव करती है। केमिकल और फार्मा सेक्टर की कंपनियों के मार्जिन काफी हद तक ब्राजील के साथ होने वाले नए समझौतों और रेगुलेटरी एक्सेस पर निर्भर करेंगे।
