बेल्जियम के प्रधानमंत्री Bart De Wever ने 4 सितंबर, 2026 को मुंबई का दौरा किया। इस यात्रा का मुख्य मकसद भारत और बेल्जियम के बीच आर्थिक रिश्तों को नई दिशा देना है। फाइनेंशियल ईयर 2026 में दोनों देशों के बीच **$13 बिलियन** का व्यापार हुआ है और अब फोकस केवल डायमंड ट्रेड तक सीमित न रहकर फार्मा, केमिकल और इंजीनियरिंग जैसे सेक्टरों पर शिफ्ट हो रहा है।
रिश्तों में नया बदलाव
बेल्जियम के प्रधानमंत्री के मुंबई दौरे ने दोनों देशों के बीच दशकों पुराने रिश्तों को एक नई रणनीति दी है। अब तक दोनों देशों का व्यापार काफी हद तक डायमंड इंडस्ट्री पर टिका था, लेकिन अब इसे फार्मास्यूटिकल्स, स्पेशलिटी केमिकल्स और ऑटोमोटिव कंपोनेंट्स जैसे हाई-ग्रोथ सेक्टरों की तरफ मोड़ने की तैयारी है। इस रणनीति का मुख्य हिस्सा 'Port of Antwerp-Bruges' को एक रणनीतिक गेटवे के तौर पर इस्तेमाल करना है, जिससे भारतीय सामानों की यूरोप तक पहुंच आसान और सस्ती हो सके।
इंडिया-EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का असर
केंद्रीय मंत्री Piyush Goyal ने भी इंडिया-EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर सहमति की पुष्टि की है। यह समझौता भारतीय निर्यातकों के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है क्योंकि इससे न केवल टैरिफ में कमी आएगी, बल्कि यूरोप के बाजार में भारतीय मैन्युफैक्चर्ड गुड्स के लिए कॉम्पिटिशन भी बढ़ेगा।
डायमंड निर्भरता से मुक्ति
पिछले कुछ सालों में ट्रेड डेटा में काफी उतार-चढ़ाव देखे गए हैं। फाइनेंशियल ईयर 2022 में जो व्यापार $20 बिलियन के स्तर पर था, वह 2026 में घटकर $13 बिलियन रह गया। इसकी बड़ी वजह डायमंड सेक्टर की वोलेटिलिटी रही है। अब सरकार और प्राइवेट सेक्टर का लक्ष्य एक ऐसा 'एक्सपोर्ट बास्केट' तैयार करना है जो बाजार के उतार-चढ़ाव से कम प्रभावित हो।
निवेशकों के लिए जोखिम और चुनौतियां
निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि इस बदलाव की सफलता पूरी तरह से इंडिया-EU एग्रीमेंट के सही क्रियान्वयन पर टिकी है। यदि यूरोप में प्रोटेक्शनिस्ट नीतियां आती हैं, तो ग्रोथ टारगेट पर असर पड़ सकता है। साथ ही, भारतीय कंपनियों को यूरोपीय क्वालिटी स्टैंडर्ड्स के साथ तालमेल बैठाने के लिए लंबी दौड़ में खुद को साबित करना होगा। बाजार की नजरें अब 2027 की शुरुआत में प्रस्तावित लॉजिस्टिक्स और एनर्जी सेक्टर के प्रोजेक्ट्स पर टिकी होंगी।
