Government Borrowing: सरकार की दूसरी छमाही के लिए तैयारी, लंबी अवधि के बॉन्ड्स की मांग में तेजी

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Government Borrowing: सरकार की दूसरी छमाही के लिए तैयारी, लंबी अवधि के बॉन्ड्स की मांग में तेजी

सरकार ने फाइनेंशियल ईयर की दूसरी छमाही के लिए उधार योजना पर चर्चा शुरू कर दी है। **₹17.2 ट्रिलियन** के रिकॉर्ड सालाना टारगेट के बीच, निवेशक **30 से 50 साल** के अल्ट्रा-लॉन्ग बॉन्ड्स की मांग कर रहे हैं ताकि वे लंबे समय तक फिक्स्ड रिटर्न सुरक्षित कर सकें।

भारत सरकार फाइनेंशियल ईयर की दूसरी छमाही (अक्टूबर से मार्च) के लिए अपनी उधार रणनीति को अंतिम रूप देने के लिए इस सप्ताह बैंकर्स और बड़े निवेशकों के साथ औपचारिक बातचीत शुरू कर रही है। इस साल का कुल ग्रॉस बरोइंग टारगेट ₹17.2 ट्रिलियन तय किया गया है, जिसके चलते सरकार को नई सरकारी प्रतिभूतियों (Government Securities) की सप्लाई को बेहद सावधानी से मैनेज करना होगा।

लंबी अवधि के बॉन्ड्स पर जोर

इस बातचीत में मुख्य रूप से इंश्योरेंस कंपनियों और पेंशन फंड्स के प्रतिनिधि शामिल हैं। ये संस्थाएं 30 से 50 साल की मैच्योरिटी वाले अल्ट्रा-लॉन्ग बॉन्ड्स की सप्लाई बढ़ाने की मांग कर रही हैं। इनका उद्देश्य अपनी लंबी अवधि की देनदारियों को ऐसे एसेट्स के साथ मैच करना है, जो दशकों तक सुरक्षित और स्थिर रिटर्न दे सकें। इससे वे भविष्य में गिरती ब्याज दरों के जोखिम से बचकर एक फिक्स्ड रिटर्न को लॉक कर सकते हैं।

फिस्कल डेफिसिट और मार्केट सप्लाई

अप्रैल से जुलाई 2026 तक के डेटा के अनुसार, फिस्कल डेफिसिट ₹4.55 ट्रिलियन रहा, जो पूरे साल के ₹16.96 ट्रिलियन के लक्ष्य का करीब 26.8% है। सरकार फिलहाल बजट सीमा के भीतर है, लेकिन बॉन्ड मार्केट इस बात को लेकर सतर्क है कि दूसरी छमाही में कितनी बड़ी मात्रा में डेट मार्केट में आएगा। यदि एक साथ ज्यादा बॉन्ड जारी किए गए, तो यील्ड (Yield) पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे सरकार की ब्याज लागत बढ़ जाएगी और बॉन्ड की कीमतों में गिरावट आ सकती है।

ग्लोबल रिस्क और निवेशकों का मूड

बाजार के सेंटीमेंट पर महंगाई और कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में उतार-चढ़ाव का साया है। इसके साथ ही भू-राजनीतिक तनावों के कारण विदेशी निवेशकों का भरोसा डगमगाया हुआ है। अब सभी की निगाहें सरकार द्वारा घोषित किए जाने वाले उधार कैलेंडर (Borrowing Calendar) पर टिकी हैं, जिससे स्पष्ट होगा कि कुल इश्यू साइज कितना होगा और बॉन्ड्स का मैच्योरिटी मिक्स क्या रहने वाला है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.