वित्त मंत्रालय ने फाइनेंशियल ईयर 2027-28 के लिए बजट की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सभी मंत्रालयों को अपने फाइनेंशियल अनुमान **6 अक्टूबर 2026** तक जमा करने के निर्देश दिए गए हैं। यह प्रक्रिया देश की आगामी आर्थिक दिशा और सरकार की प्राथमिकताओं को तय करने में अहम भूमिका निभाती है।
बजट की तैयारी और समय-सीमा
केंद्रीय वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग (Department of Economic Affairs) ने एक सर्कुलर जारी कर सभी सरकारी मंत्रालयों को अपने फाइनेंशियल एस्टिमेट्स तैयार करने को कहा है। बजट बनाने की इस औपचारिक प्रक्रिया में मंत्रालयों को 6 अक्टूबर 2026 तक अपने खर्चों के अनुमान और चालू वित्त वर्ष 2026-27 के अपडेटेड खर्चे जमा करने होंगे। इसके बाद 12 अक्टूबर 2026 से एक्सपेंडिचर सेक्रेटरी की अध्यक्षता में प्री-बजट मीटिंग्स शुरू होंगी, जबकि टैक्स रिसिप्ट अनुमान देने के लिए 15 अक्टूबर 2026 की डेडलाइन तय की गई है।
सरकारी योजनाओं की समीक्षा
सरकार का स्पष्ट निर्देश है कि उन योजनाओं की पहचान की जाए और उन्हें बंद किया जाए, जो 2026-27 के बाद अब जरूरी नहीं हैं। सरकार का लक्ष्य गैर-जरूरी खर्चों में कटौती कर संसाधनों को इंफ्रास्ट्रक्चर और सोशल वेलफेयर जैसे उच्च-प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में लगाना है।
विनिवेश और राजकोषीय अनुशासन
सरकार अपने रेवेन्यू लक्ष्यों को लेकर भी काफी सख्त है। मौजूदा आंकड़ों के अनुसार, सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अपने विनिवेश (Disinvestment) लक्ष्य का लगभग 78% पूरा कर लिया है। सरकार ने ₹80,000 करोड़ के कुल लक्ष्य में से ₹55,757 करोड़ जुटा लिए हैं। बाजार के जानकारों के अनुसार, यह अनुशासन सरकार की उधारी को कम करने में मदद करता है, जिसका सीधा असर इन्फ्लेशन और इंटरेस्ट रेट्स पर पड़ता है। निवेशक अब बजट मीटिंग्स के दौरान सरकार के फिस्कल डेफिसिट मैनेजमेंट और इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च को लेकर आने वाले संकेतों पर बारीकी से नजर रखेंगे।
