BofA सर्वे: भारतीय शेयर बाजार एशिया में सबसे कम पसंदीदा, निवेशक चिंतित

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AuthorAditya Rao|Published at:
BofA सर्वे: भारतीय शेयर बाजार एशिया में सबसे कम पसंदीदा, निवेशक चिंतित

बैंक ऑफ अमेरिका (Bank of America) के एक हालिया सर्वे में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। ग्लोबल फंड मैनेजर्स की नजर में अब भारतीय शेयर बाजार (Indian Stock Market) एशिया में सबसे कम पसंदीदा बन गया है। सर्वे में **32%** उत्तरदाताओं ने भारतीय शेयरों में 'अंडरवेट' (underweight) होने की बात कही है।

फंड मैनेजर्स ने क्यों बदली राय?

बैंक ऑफ अमेरिका द्वारा 98 फंड मैनेजर्स के बीच किए गए इस सर्वे में, जो कुल $272 बिलियन की संपत्ति का प्रबंधन करते हैं, यह सामने आया कि 32% मैनेजर्स अब भारत के प्रति 'बियरिश' (bearish) हो गए हैं। इसका मतलब है कि उन्होंने भारतीय शेयरों से दूरी बना ली है और दूसरे एशियाई बाजारों की ओर रुख कर रहे हैं।

मजबूत नतीजे और विदेशी निवेश के बावजूद गिरावट?

दिलचस्प बात यह है कि यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब भारतीय कंपनियों के नतीजे (Corporate Earnings) काफी मजबूत रहे हैं। निफ्टी 50 इंडेक्स की कंपनियों ने पिछली तिमाही में 18% का ईयर-ऑन-ईयर (year-on-year) मुनाफा दर्ज किया है, जो उम्मीदों से बेहतर था। साथ ही, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भी इस तिमाही में $4 बिलियन से ज्यादा का निवेश भारतीय शेयरों में किया है, जो पहले के आउटफ्लो (outflows) के बाद एक अच्छी रिकवरी है।

निवेशकों की मुख्य चिंताएं

इसके बावजूद, निवेशकों की चिंताएं बनी हुई हैं। सर्वे में प्रमुख चिंताओं में शामिल हैं:

  • AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) थीम में कम एक्सपोजर: ग्लोबल मार्केट में AI एक बड़ा बूस्ट रहा है, लेकिन भारत का इसमें सीमित योगदान माना जा रहा है।
  • हाई वैल्यूएशन (High Valuations): कई फंड मैनेजर्स का मानना है कि मौजूदा शेयर की कीमतें भविष्य की कमाई के अनुमानों के हिसाब से ज्यादा हैं।
  • धीमी आर्थिक ग्रोथ (Slow Economic Growth): भारत की आर्थिक वृद्धि की गति धीमी रहने की आशंका है।
  • स्ट्रक्चरल रिफॉर्म्स (Structural Reforms): कुछ निवेशकों को उम्मीद थी कि सुधारों की गति तेज होगी, लेकिन वैसा नहीं हुआ।

मार्केट पर असर

इन चिंताओं का असर मार्केट पर भी दिख रहा है। निफ्टी 50 इंडेक्स इस साल अब तक लगभग 8% गिर चुका है। वहीं, इंडोनेशिया के प्रति सेंटीमेंट (sentiment) इस सर्वे में सुधरा है, जिसके जकार्ता कंपोजिट इंडेक्स (Jakarta Composite Index) में तेजी देखी गई है।

आगे क्या?

फिलहाल, जापान और ताइवान फंड मैनेजर्स के लिए एशिया में सबसे पसंदीदा बाजार बने हुए हैं। भारतीय बाजार के लिए यह देखना अहम होगा कि क्या कॉर्पोरेट कमाई की रफ्तार बनी रहती है और क्या वैल्यूएशन के मामले में यह अपने क्षेत्रीय साथियों की तुलना में ज्यादा आकर्षक बनता है।rising energy prices और currency depreciation का कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर असर भी एक बड़ा रिस्क बना हुआ है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.