स्वास्थ्य मंत्रालय ने निकोटीन पाउच की बिक्री और डिस्ट्रीब्यूशन पर रोक लगा दी है। अब इन्हें 'अनअप्रूव्ड ड्रग्स' (Unapproved Drugs) माना जाएगा, जिससे Zyn जैसे ब्रांड्स का बाजार बंद हो गया है।
नियम क्यों बदले गए?
भारत सरकार ने सितंबर 2026 में एक कड़ा निर्देश जारी करते हुए निकोटीन पाउच को 'अनअप्रूव्ड ड्रग्स' की श्रेणी में डाल दिया है। इसका सीधा मतलब है कि अब देश भर में इनकी बिक्री, इंपोर्ट और सप्लाई पूरी तरह से अवैध है। पहले ये प्रोडक्ट्स COTPA (Cigarettes and Other Tobacco Products Act) के दायरे से बाहर थे, जिसका फायदा उठाकर कंपनियां इन्हें बाजार में बेच रही थीं।
कंपनियों के लिए बड़ा झटका
ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड (DTAB) ने साफ कर दिया है कि किसी भी नए निकोटीन फॉर्मूलेशन को मंजूरी नहीं दी जाएगी। इससे Philip Morris International जैसे दिग्गजों के लिए भारत का रास्ता बंद हो गया है, क्योंकि उनका ब्रांड Zyn पहले ही भारतीय बाजार में नजर आने लगा था। अब इन प्रोडक्ट्स की बिक्री को 'ड्रग कंट्रोल रेगुलेशंस' का उल्लंघन माना जाएगा, जिससे डिस्ट्रीब्यूटर्स और रिटेलर्स पर कानूनी कार्रवाई और माल जब्त होने का खतरा मंडरा रहा है।
स्वास्थ्य चिंताओं का हवाला
Indian Council of Medical Research (ICMR) समेत तमाम स्वास्थ्य एजेंसियां लंबे समय से इनके खिलाफ आवाज उठा रही थीं। उनका मानना है कि ये प्रोडक्ट्स युवाओं को लुभाते हैं और इनके इस्तेमाल से दिमाग और दिल की सेहत पर बुरा असर पड़ता है। सरकार का यह कदम साफ तौर पर सार्वजनिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए बिना किसी रेगुलेशन के बढ़ रहे इस 'नीश' मार्केट को खत्म करने के लिए उठाया गया है।
