भारत ने अपनी स्पेशल FCNR(B) स्वैप विंडो को सफलतापूर्वक बंद कर दिया है, जिसमें रिकॉर्ड **$127.2 अरब** की राशि जमा हुई है। इससे अर्थव्यवस्था को अगले **12 से 18 महीनों** के लिए बाहरी अस्थिरता से सुरक्षा मिली है, हालांकि एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह केवल एक अस्थायी उपाय है।
विदेशी मुद्रा भंडार में भारी इजाफा
जून से अगस्त 2026 तक चली इस स्पेशल स्कीम के तहत भारत को $127.2 अरब की बड़ी रकम हासिल हुई है। यदि इसमें एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग्स (ECB) जैसे अन्य उपायों को जोड़ दिया जाए, तो यह आंकड़ा लगभग $136.4 अरब तक पहुंच जाता है। इस बड़े इन्फलो से विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) को काफी मजबूती मिली है और रुपये पर ग्लोबल मार्केट का दबाव भी कम हुआ है।
लंबी अवधि की सुरक्षा
पहले मार्केट में हेजिंग केवल 3 से 6 महीने की होती थी, जिससे रुपया ग्लोबल मार्केट के उतार-चढ़ाव के प्रति संवेदनशील बना रहता था। अब इन FCNR डिपॉजिट्स के जरिए इस रिस्क को 3 से 5 साल की लंबी अवधि की कमिटमेंट में बदल दिया गया है। वर्ल्ड बैंक के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर नीलकंठ मिश्रा के अनुसार, यह अर्थव्यवस्था के लिए एक 'ब्रीदिंग रूम' की तरह है, जो लिक्विडिटी क्राइसिस के डर के बिना फंडामेंटल्स सुधारने का समय देता है।
अभी भी सावधान रहने की जरूरत
हालांकि यह बफर एक राहत है, लेकिन यह पूरी तरह से समस्या का समाधान नहीं है। कच्चा तेल (Crude Oil) की कीमतों में हर $1 की बढ़ोतरी से भारत पर करीब $1.8 अरब का अतिरिक्त बोझ पड़ता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार को इस समय का इस्तेमाल स्ट्रक्चरल रिफॉर्म्स के लिए करना चाहिए। अंत में, देश की फाइनेंशियल हेल्थ तभी मजबूत होगी जब FDI जैसे स्थायी निवेश के रास्ते खुलेंगे और विदेशी मुद्रा की आवक लगातार बनी रहेगी।
