भारत और बांग्लादेश के बीच नई दिल्ली में 16वीं 'Joint Working Group on Trade' की बैठक हुई है। तीन साल के लंबे अंतराल के बाद हुई यह वार्ता व्यापारिक बाधाओं को दूर करने और सप्लाई चेन को स्थिर करने के लिए बेहद अहम है।
भारत और बांग्लादेश के बीच 9 अक्टूबर, 2026 को संपन्न हुई यह 16वीं बैठक आर्थिक संबंधों को सुधारने की दिशा में एक बड़ा कदम है। पिछले तीन वर्षों में राजनीतिक और लॉजिस्टिक चुनौतियों के कारण दोनों देशों के बीच व्यापार प्रभावित हुआ था।
व्यापारिक बाधाओं पर मंथन
बांग्लादेश की एडिशनल सेक्रेटरी आयशा अख्तर के नेतृत्व में हुई चर्चा में उन मुद्दों पर फोकस रहा, जिन्होंने बॉर्डर पर व्यापार की गति को धीमा कर दिया है। भारतीय एक्सपोर्टर्स के लिए सबसे बड़ी चुनौती बांग्लादेश द्वारा अप्रैल 2025 से भारतीय यार्न (yarn) पर लगाया गया बैन और जटिल सर्टिफिकेशन नियम हैं। वहीं, दूसरी ओर बांग्लादेश ने जूट प्रोडक्ट्स पर भारत द्वारा लगाए गए एंटी-डंपिंग ड्यूटी पर अपनी चिंता जताई है, जिससे उस सेक्टर के प्रोड्यूसर्स में अनिश्चितता का माहौल है।
कमर्शियल इम्पैक्ट और डेटा
वित्तीय वर्ष 2025-26 में दोनों देशों के बीच ट्रेड वॉल्यूम में गिरावट देखी गई है। डेटा के मुताबिक, भारत का बांग्लादेश को एक्सपोर्ट $10.96 बिलियन और बांग्लादेश से इंपोर्ट $1.75 बिलियन रहा है। निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि टेक्सटाइल, फूड प्रोसेसिंग और जूट जैसे उद्योगों में काम करने वाली कंपनियों के लिए ये व्यापारिक बाधाएं हटना कितना जरूरी है ताकि बिजनेस की लागत कम हो सके।
आगे की राह
बांग्लादेश अब अपनी 'Least Developed Country' (LDC) स्टेटस से बाहर निकलने की तैयारी कर रहा है और SAFTA के तहत भारत में ड्यूटी-फ्री एक्सेस को जारी रखना चाहता है। हालांकि, बांग्लादेश की महंगाई और करेंसी डेप्रिसिएशन जैसी चुनौतियां व्यापारिक नीतियों में ढील देने की रफ्तार को प्रभावित कर सकती हैं। फिलहाल, सप्लाई चेन की अनिश्चितता एक बड़ा रिस्क बनी हुई है, जिस पर निवेशकों की नजर होनी चाहिए।
