भारत और BRICS देशों के बीच ट्रेड का वॉल्यूम फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में **$417 बिलियन** के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, जो पांच साल पहले के **$203 बिलियन** से दोगुना है। हालांकि, आयात (Imports) में भारी उछाल के कारण ट्रेड डेफिसिट (Trade Deficit) का संकट गहरा गया है। अब भारत का लक्ष्य 2030 तक एक्सपोर्ट को **$200 बिलियन** तक ले जाने का है।
भारत और BRICS देशों के बीच व्यापारिक रिश्ते नई ऊंचाइयों पर हैं। दिल्ली में इस सितंबर में आयोजित 18वीं BRICS समिट के दौरान सामने आए आंकड़ों के अनुसार, फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में कुल ट्रेड वॉल्यूम $417 बिलियन दर्ज किया गया। यह 2020-21 के $203 बिलियन की तुलना में एक बड़ा उछाल है, जो ग्लोबल ट्रेड एलायंस में भारत की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।
ट्रेड डेफिसिट का क्या है गणित?
भले ही कुल ट्रेड का आंकड़ा बड़ा दिख रहा है, लेकिन सिक्के का दूसरा पहलू भारत के लिए चिंताजनक है। साल 2025-26 में भारत का कुल एक्सपोर्ट सिर्फ $96 बिलियन रहा, जो कि आयात की तुलना में काफी कम है। यह असंतुलन भारत के बैलेंस ऑफ पेमेंट के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
एक्सपोर्ट बढ़ाने का रोडमैप
ASSOCHAM की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, भारत अब अपनी रणनीति बदल रहा है। 2030 तक एक्सपोर्ट को $200 बिलियन तक पहुंचाने के लिए फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग गुड्स, केमिकल्स और डिजिटल सर्विसेज जैसे हाई-वैल्यू सेक्टर्स पर जोर दिया जा रहा है। इसका मकसद ग्लोबल सप्लाई चेन में भारत की हिस्सेदारी को मजबूती देना है।
निवेशकों के लिए चेतावनी
बाजार के जानकारों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि BRICS+ ग्रुप से हम क्रिटिकल मिनरल्स और ऊर्जा आपूर्ति के लिए बहुत ज्यादा निर्भर हैं। यदि इन देशों की नीतियों में बदलाव होता है या सप्लाई चेन में कोई बाधा आती है, तो भारत के लिए घरेलू लागत बढ़ सकती है। आने वाले समय में सरकार की नई एक्सपोर्ट इंसेंटिव पॉलिसी और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में सुधार ही यह तय करेंगे कि हम इस घाटे को कितना कम कर पाते हैं।
