FY2026 में भारत और BRICS देशों के बीच ट्रेड वॉल्यूम दोगुना होकर **$417 बिलियन** पहुंच गया है। हालांकि, व्यापार में **$226.1 बिलियन** का भारी घाटा चिंता का विषय है। अब सरकार का लक्ष्य 2030 तक एक्सपोर्ट को **$200 बिलियन** तक ले जाने का है।
भारत और BRICS देशों के बीच आर्थिक रिश्तों ने एक नया मुकाम हासिल किया है। फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में कुल ट्रेड वॉल्यूम बढ़कर $417 बिलियन के स्तर पर पहुंच गया है। यह आंकड़ा 2020-21 के $203 बिलियन से दोगुना है। इस डेटा को ASSOCHAM ने तब साझा किया है जब दिल्ली में 18वीं BRICS समिट आयोजित हो रही है।
व्यापार घाटे का गणित (Balancing the Trade Gap)
आंकड़ों की चमक के पीछे ट्रेड बैलेंस एक बड़ी चुनौती है। पिछले फाइनेंशियल ईयर में भारत का एक्सपोर्ट महज $96 बिलियन रहा, जबकि कुल ट्रेड $417 बिलियन था। इसका मतलब है कि भारत $226.1 बिलियन के ट्रेड डेफिसिट में है। देश अभी भी एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स और कच्चे माल के लिए सदस्य देशों पर काफी निर्भर है। इस गैप को कम करने के लिए अब फोकस लोकल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने और एक्सपोर्ट कंपिटिटिवनेस बढ़ाने पर है।
$200 बिलियन एक्सपोर्ट का लक्ष्य
इंडस्ट्री के अनुमानों के मुताबिक, 2030 तक भारत इन देशों को $200 बिलियन का एक्सपोर्ट कर सकता है। इसके लिए फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग गुड्स, टेक्सटाइल और ऑटोमोबाइल जैसे सेक्टर्स पर दांव लगाया जा रहा है। यदि यह लक्ष्य हासिल होता है, तो इससे न केवल ट्रेड बैलेंस सुधरेगा बल्कि इन सेक्टर में जुड़ी कंपनियों की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता में भी जबरदस्त उछाल आएगा।
इसके अलावा, BRICS के साथ साझेदारी क्रिटिकल मिनरल्स और एनर्जी रिसोर्सेज तक पहुंच आसान बनाने में मदद कर रही है, जो भारत के एनर्जी ट्रांजिशन के लिए बेहद जरूरी है।
निवेशकों के लिए काम की बात
इन्वेस्टर्स को अब यह देखना होगा कि कंपनियां इंजीनियरिंग और फार्मा जैसे सेक्टर्स में एक्सपोर्ट ग्रोथ को कैसे स्केल करती हैं। इसके अलावा, BRICS समिट से निकलने वाले नए ट्रेड एग्रीमेंट्स और पॉलिसी बदलावों पर भी नजर रखें, क्योंकि यही आगे चलकर ट्रेड डेफिसिट कम करने में गेम-चेंजर साबित हो सकते हैं।
