भारत ने ब्यूनस आयर्स में अपना अब तक का सबसे बड़ा बिजनेस डेलीगेशन भेजा है। इसका लक्ष्य लिथियम माइनिंग, 5G और फार्मा सेक्टर में व्यापार को नई रफ्तार देना है। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार **$6.5 बिलियन** के पार पहुंच गया है।
भारत और अर्जेंटीना अपने कमर्शियल और स्ट्रेटेजिक रिश्तों को एक नई ऊंचाइयों पर ले जा रहे हैं। कॉमर्स सेक्रेटरी राजेश अग्रवाल के नेतृत्व में 25 से ज्यादा दिग्गज उद्योगपतियों का एक प्रतिनिधिमंडल हाल ही में ब्यूनस आयर्स पहुंचा है। यह दौरा 'चौथी भारत-अर्जेंटीना जॉइंट ट्रेड कमिटी' की बैठक का हिस्सा है, जहां लिथियम, 5G टेलीकॉम और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर मुख्य रूप से चर्चा हुई।
व्यापार में दमदार ग्रोथ
पिछले कुछ समय में दोनों देशों के बीच व्यापार में 17% की सालाना बढ़ोतरी देखी गई है, जिसके साथ ही द्विपक्षीय व्यापार $6.5 बिलियन के स्तर को पार कर गया है। भारत अब अर्जेंटीना का पांचवां सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर बन चुका है।
KABIL और फार्मा सेक्टर के लिए बड़ी खबर
इस मिशन का सबसे बड़ा असर एनर्जी और हेल्थकेयर सेक्टर में दिखेगा। खानिज बिदेश इंडिया लिमिटेड (KABIL) ने अर्जेंटीना के कातामार्का में लिथियम प्रोजेक्ट के दूसरे चरण की ड्रिलिंग पूरी कर ली है, जो भारत की इलेक्ट्रिक व्हीकल और बैटरी मैन्युफैक्चरिंग के लिए बेहद अहम है। साथ ही, अर्जेंटीना ने भारतीय फार्मा एक्सपोर्ट के लिए नियमों को आसान करते हुए भारत का दर्जा 'Annex II' से बढ़ाकर 'Annex I' कर दिया है।
निवेशकों के लिए चेतावनी (Risk Factors)
इस मिशन में UPL, किर्लोस्कर (Kirloskar) और आदित्य बिड़ला ग्रुप जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं, लेकिन निवेशकों को सावधानी बरतनी चाहिए।
- UPL: कंपनी फिलहाल कर्ज के दबाव और ऑर्गेनाइजेशनल रीस्ट्रक्चरिंग से गुजर रही है।
- Kirloskar: कंपनी ने जून 2026 में खत्म हुई तिमाही में नेट लॉस दर्ज किया है।
इसके अलावा, लैटिन अमेरिकी बाजारों में नॉन-टैरिफ बैरियर्स और रेगुलेटरी चुनौतियां बनी हुई हैं। निवेशकों को अब KABIL के लिथियम प्रोजेक्ट की प्रोग्रेस और इन कंपनियों के फाइनेंशियल परफॉर्मेंस पर कड़ी नजर रखनी होगी।
