₹10 और ₹20 के नोट होंगे प्लास्टिक के? भारत में शुरू हुआ खास ट्रायल!

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
₹10 और ₹20 के नोट होंगे प्लास्टिक के? भारत में शुरू हुआ खास ट्रायल!

भारत सरकार ने ₹10 और ₹20 के एक-एक अरब प्लास्टिक (पॉलिमर) करेंसी नोटों के ट्रायल को हरी झंडी दे दी है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अब यह देखेगा कि क्या ये नए नोट भारत के मौसम में कागज के नोटों से ज़्यादा टिकाऊ साबित होते हैं। फिलहाल, ये कागज के नोटों के साथ ही चलन में रहेंगे, इन्हें तुरंत बदलने की कोई योजना नहीं है।

करेंसी में बड़ा बदलाव

भारतीय सरकार ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) को पॉलिमर (प्लास्टिक) आधारित करेंसी नोटों के फील्ड ट्रायल के लिए मंजूरी दे दी है। इस पहल के तहत, ₹10 और ₹20 के एक-एक अरब प्लास्टिक नोट जारी किए जाएंगे। इस कदम का मुख्य उद्देश्य यह जांचना है कि नए प्लास्टिक सब्सट्रेट की परफॉरमेंस और ड्यूरेबिलिटी (टिकाऊपन) पारंपरिक कागज की तुलना में कैसी है। यह सेंट्रल बैंक की करेंसी मैनेजमेंट को मॉडर्न बनाने की दिशा में एक अहम कदम है।

RBI की तैयारी

RBI एक्ट, 1934 की धारा 25 के तहत, RBI ने सरकार को यह प्रस्ताव सौंपा था, जिसमें किसी भी बड़े पैमाने पर रोलआउट से पहले फील्ड टेस्टिंग की आवश्यकता पर जोर दिया गया था। RBI की सहायक कंपनी, भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड (BRBNMPL), ने पहले ही आवश्यक सामग्री की सोर्सिंग शुरू कर दी है। कंपनी ने बायएक्सियली ओरिएंटेड पॉलीप्रोपाइलीन (BOPP) आधारित पॉलिमर सब्सट्रेट की आपूर्ति के लिए निर्माताओं से ग्लोबल एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) भी जारी किया है, जिसकी अंतिम तिथि 18 अगस्त, 2026 है।

कागज के नोटों को तुरंत नहीं बदलेगा?

हालांकि पॉलिमर करेंसी को लाने की बात चल रही है, लेकिन सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह कागज की करेंसी को तुरंत बदलने की दिशा में कोई कदम नहीं है। ये प्लास्टिक नोट मौजूदा कागज के बैंकनोटों के साथ ही चलन में रहेंगे। इस डुअल-करेंसी (दोहरी करेंसी) दृष्टिकोण से सेंट्रल बैंक वर्तमान सप्लाई को बनाए रखने के साथ-साथ यह डेटा भी जुटा पाएगा कि नया पॉलिमर सब्सट्रेट रोजमर्रा के इस्तेमाल में कितनी मजबूती से टिकता है।

अर्थव्यवस्था और आगे की राह

यह एक पायलट प्रोजेक्ट है, न कि बड़े पैमाने पर बदलाव। भारत की विविध और अक्सर चरम जलवायु परिस्थितियों में इन नोटों की प्रभावशीलता एक मुख्य जांच का विषय रहेगी। हालांकि अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों से पता चलता है कि पॉलिमर नोटों का जीवनकाल लंबा होता है, लेकिन भारत में उनका प्रैक्टिकल परफॉरमेंस अभी साबित होना बाकी है। इसके अलावा, प्रोक्योरमेंट प्रक्रिया में विशेष ग्लोबल सप्लाई चेन पर निर्भरता का भी अंदेशा है, जो लागत और उपलब्धता को प्रभावित कर सकती है।

निवेशकों और जानकारों को यह ध्यान रखना चाहिए कि यह प्रोजेक्ट अभी शुरुआती चरण में है। आधिकारिक अनुमानों के अनुसार, इन नोटों का संभावित सर्कुलेशन अगले फाइनेंशियल ईयर, यानी FY28 में हो सकता है, जो कि इन ट्रायल्स की सफलता पर निर्भर करेगा। सेंट्रल बैंक संभवतः प्लास्टिक सब्सट्रेट बनाम पारंपरिक कागज की ड्यूरेबिलिटी, यूजर एक्सेप्टेंस और लागत-लाभ अनुपात का विश्लेषण करने पर ध्यान केंद्रित करेगा। टेंडर के नतीजों, उत्पादन की अंतिम लागत और किसी भी संभावित रोलआउट की तारीखों से जुड़ी भविष्य की अपडेट्स इस प्रोग्राम की प्रगति को दर्शाएंगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.