भारत सरकार ने एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। अब विदेशी ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स को एक्सपोर्ट ऑपरेशंस के लिए **100%** FDI के साथ इन्वेंट्री रखने की अनुमति मिल गई है, हालांकि घरेलू बाजार के लिए नियम पहले जैसे ही रहेंगे।
भारत सरकार ने DGFT नोटिफिकेशन नंबर 27/2026-27 के जरिए एक नई पॉलिसी लागू की है। इसका मुख्य उद्देश्य भारतीय MSMEs को ग्लोबल मार्केट तक आसान पहुंच प्रदान करना है। अब विदेशी फंड वाली कंपनियां 'एक्सपोर्टर-ऑन-रिकॉर्ड' (EOR) के तौर पर रजिस्टर होकर भारतीय सामानों की इन्वेंट्री अपने पास रख सकेंगी और उसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेच सकेंगी।
कैसे काम करेगा नया मॉडल?
इस नई व्यवस्था के तहत कंपनियां अब कस्टम्स डॉक्यूमेंटेशन, कंप्लायंस और लॉजिस्टिक्स की जिम्मेदारी खुद उठाएंगी। इसके लिए सरकार खास 'E-Commerce Export Hubs' भी बना रही है, ताकि वेयरहाउसिंग और डिजिटल कस्टम्स क्लीयरेंस में कोई अड़चन न आए।
घरेलू बाजार के लिए क्या है नियम?
सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि यह छूट सिर्फ और सिर्फ एक्सपोर्ट ऑपरेशंस के लिए है। घरेलू बाजार में विदेशी निवेश वाली कंपनियों के लिए इन्वेंट्री-आधारित मॉडल पर प्रतिबंध पहले की तरह लागू रहेगा। यह कदम छोटे भारतीय दुकानदारों को विदेशी दिग्गज कंपनियों की अनुचित प्रतिस्पर्धा से बचाने के लिए उठाया गया है।
चिंताएं और निगरानी
पॉलिसी के ऐलान के बाद Confederation of All India Traders (CAIT) ने इस पर चिंता जताई है। व्यापारियों को डर है कि कहीं एक्सपोर्ट के नाम पर आने वाला सामान वापस घरेलू बाजार में 'लीकेज' न हो जाए, जिससे लोकल मार्केट में कीमतों का संतुलन बिगड़ सकता है। अब निवेशकों की नजर इस बात पर है कि सरकार इसे कितनी सख्ती से मॉनिटर करती है और प्लेटफॉर्म्स इन्वेंट्री को फिजिकल और डिजिटल रूप से कैसे अलग रखते हैं।
